महासमुंद। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बारनवापारा वानांचल क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे ग्रामीणों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर शासन-प्रशासन के दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी जब कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो ग्रामीणों ने आगामी 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरना और बच्चों के स्कूल बहिष्कार का एक बड़ा फैसला ले लिया। ग्रामीणों के इस कड़े और सामूहिक आंदोलन की चेतावनी मिलते ही महासमुंद जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया और आनन-फानन में वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम को जमीनी स्तर पर बातचीत के लिए सीधे गांव रवाना किया गया।
कलेक्टर के निर्देश पर मोंहदा गांव पहुंचे आला अधिकारी, चौपाल लगाकर सुनीं समस्याएं
कलेक्टर के कड़े और सीधे निर्देश पर अपर कलेक्टर, स्थानीय तहसीलदार, विद्युत विभाग और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक दल ग्राम मोंहदा पहुंचा। अधिकारियों ने आंदोलन पर आमादा ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के साथ एक लंबी और विस्तृत बैठक की। इस चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने अपनी सालों पुरानी समस्याओं और प्रशासनिक उपेक्षा को अधिकारियों के सामने प्रमुखता से रखा। अधिकारियों ने ग्रामीणों की हर एक लंबित मांग को गंभीरता से सुना और उनकी समस्याओं के त्वरित व समय-सीमा के भीतर समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई करने का आधिकारिक भरोसा दिलाया।
लो-वोल्टेज और बिजली संकट दूर करने के लिए तैयार हुआ ₹118 करोड़ का मेगा प्लान
बैठक में मौजूद विद्युत विभाग के आला अधिकारियों ने ग्रामीणों को एक बड़ी खुशखबरी देते हुए बताया कि वनांचल क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त और मजबूत करने के लिए 118 करोड़ रुपये का एक वृहद बिजली परियोजना प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस वित्तीय प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए शासन के उच्च स्तर पर भेजा जा चुका है। जिला प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि इस योजना की हर एक प्रगति और बजट की स्थिति से स्थानीय पंचायत और ग्रामीणों को समय-समय पर पूरी तरह अवगत कराया जाता रहेगा।
सड़क निर्माण और वन अधिकार पत्रों पर मिला 3 महीने का कड़ा अल्टीमेटम
बिजली के अलावा ग्रामीणों ने क्षेत्र में बदहाल सड़कों के निर्माण, सामुदायिक वन अधिकार (Community Forest Rights) और सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र जारी करने का मुद्दा भी बेहद प्रखरता से उठाया। वनांचल में रहने वाले आदिवासियों और ग्रामीणों के इन हकों पर बात करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने वन विभाग को इस प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। प्रशासन ने ऑन-रिकॉर्ड आश्वासन देते हुए कहा कि कागजी और तकनीकी प्रक्रियाओं को दुरुस्त करके अगले तीन महीनों के भीतर सभी पात्र ग्रामीणों के हक में आवश्यक और सकारात्मक कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।
प्रशासनिक लिखित आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल स्थगित किया 'शाला बहिष्कार'
जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक चर्चा और हर मांग के लिए तय की गई समय-सीमा (टाइमलाइन) के लिखित व मौखिक आश्वासन के बाद, ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से 5 जुलाई से होने वाले अपने प्रस्तावित धरने और स्कूली बच्चों के शाला बहिष्कार आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का बड़ा निर्णय लिया है। हालांकि, ग्रामीण और किसान नेताओं ने दोटूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि यदि प्रशासन द्वारा तय की गई इस समय-सीमा के भीतर उनकी मांगों पर जमीनी अमल शुरू नहीं हुआ, तो वे बिना किसी पूर्व सूचना के दोबारा और अधिक उग्र आंदोलन शुरू करने को विवश होंगे।
जमीनी स्तर पर काम दिखने की शर्त पर खत्म हुई बैठक
इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक में मोंहदा और आस-पास के गांवों के जनप्रतिनिधि, वनांचल के सामाजिक कार्यकर्ता और बहुत बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुष व महिलाएं मौजूद रहीं। ग्रामीणों ने एकजुट होकर अधिकारियों से कहा कि अब वे केवल कागजी आश्वासनों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं, बल्कि उन्हें धरातल पर काम शुरू होता हुआ दिखाई देना चाहिए। प्रशासन की टीम ने भी ग्रामीणों को विश्वास दिलाया कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही उनकी समस्याओं का स्थाई निराकरण कर दिया जाएगा।

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