ग्वालियर: शहर में बिजली कंपनी द्वारा लगाए जा रहे नए स्मार्ट मीटर (Smart Meters) अब आम उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ने लगे हैं। स्मार्ट मीटर स्थापित होते ही बिजली की खपत और बिलों में अचानक कई गुना की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे मध्यवर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह चरमरा गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उपभोक्ताओं के घरों में बिजली के उपकरण और लोड पहले जितने ही हैं, इसके बावजूद मीटरों की रफ्तार 'बुलेट ट्रेन' जैसी हो गई है। इस तकनीकी गड़बड़ी को लेकर लोग पिछले एक महीने से बिजली दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
केस 1: आरएस राठौर (सिकंदर कंपू) – 24 घंटे में छलांग मार रही रीडिंग
सिकंदर कंपू के निवासी आरएस राठौर पिछले एक महीने से बिजली कंपनी के चक्कर काट रहे हैं। उनके घर में स्मार्ट मीटर लगने के बाद से रीडिंग पहले के मुकाबले चार गुना तक बढ़ गई है। राठौर द्वारा दर्ज कराया गया तारीखवार ब्योरा स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है:
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11 तारीख: 64 रीडिंग
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12 तारीख: सीधे 76 रीडिंग (मात्र 24 घंटे के भीतर भारी उछाल)
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14 तारीख: मीटर 92 यूनिट पर पहुंचा
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16 तारीख: रीडिंग बढ़कर 108 यूनिट हो गई
केस 2: जितेंद्र सिंह भदौरिया (गोवर्धन कॉलोनी) – ₹300 का बिल पहुंचा ₹1900 के पार
ऐसा ही एक अन्य चौंकाने वाला मामला गोवर्धन कॉलोनी का है। यहां के निवासी जितेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि पुराने साधारण मीटर में मई महीने की औसत खपत 64 से 78 यूनिट आती थी, जिससे उनका बिजली बिल महज ₹250 से ₹300 के बीच रहता था। लेकिन जैसे ही नया स्मार्ट मीटर लगाया गया, लोड और उपकरण समान होने के बावजूद मई की रीडिंग सीधे 198 यूनिट पर पहुंच गई। इसके चलते ₹300 आने वाला बिल अब सीधे ₹1700 से ₹1900 के बीच आ रहा है।
तकनीक और सॉफ्टवेयर पर उठे गंभीर सवाल
प्रभावित क्षेत्र के उपभोक्ताओं का सीधा आरोप है कि बिजली कंपनी बिना किसी जमीनी जांच या तकनीकी सत्यापन के मनमाने ढंग से बढ़े हुए बिल थमा रही है। लोगों का कहना है कि यदि उनके घरों में कोई नया उपकरण (जैसे एसी या हैवी मोटर) लगा होता या लोड बढ़ाया गया होता, तो बिल बढ़ना स्वाभाविक था; परंतु सब कुछ यथावत होने पर भी मीटरों की यह जादुई रफ्तार बिजली कंपनी के सॉफ्टवेयर और मीटरों की गुणवत्ता में बड़ी खराबी की ओर इशारा करती है।
अधिकारियों का पक्ष
"नगर संभाग दक्षिण क्षेत्र के विभिन्न जोनों से स्मार्ट मीटर तेज चलने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों के निवारण के लिए विभाग द्वारा संबंधित परिसरों में 'चेक मीटर' (Check Meter) लगाकर समानांतर जांच कराई गई है, लेकिन अब तक किसी भी मामले में मीटर के तेज भागने की तकनीकी पुष्टि नहीं हुई है।" — संतोष बिठ्ठल, उपमहाप्रबंधक, नगर संभाग दक्षिण

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