सिहोरा के पुल की सड़क उखड़ी, डामर हटते ही दिखीं गहरी दरारें

जबलपुर: जिले के सिहोरा अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 30 पर स्थित घाटसिमरिया का नया हिरन नदी पुल और उससे जुड़ी पहुंच सड़क इस वक्त बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच चुकी है। इस मुख्य फोरलेन मार्ग पर बने नए पुल की सड़क कई जगहों पर तीन से चार इंच तक नीचे धंस गई है, जिसकी वजह से हाईवे की छाती पर भयानक और चौड़ी दरारें साफ नजर आने लगी हैं। डराने वाली बात यह भी है कि पुल के ठीक पास बने एक छोटे नाले के ऊपर तैयार की गई कंक्रीट की सड़क भी पूरी तरह बैठ चुकी है, जिससे सड़क के दो जोड़ों के बीच पांच से छह इंच का एक बड़ा और जानलेवा गैप बन गया है। सिहोरा और जबलपुर को आपस में जोड़ने वाले इस बेहद व्यस्त हाईवे से हर रोज चौबीसों घंटे हजारों की संख्या में छोटे-बड़े वाहन और यात्री बसें गुजरती हैं, जिनके लिए तकनीकी रूप से कमजोर हो चुका यह पुल अब एक सीधे हादसे का न्योता बन चुका है।

डामर का सतही लेप फेल, भारी वाहनों के कंपन से बढ़ रहा है खतरा

इस बदहाली को लेकर स्थानीय निवासियों ने भारी चिंता जाहिर करते हुए बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के जिम्मेदारों ने कुछ समय पहले इन जानलेवा दरारों को छिपाने के लिए उन पर डामर की एक हल्की परत बिछाकर खानापूर्ति करने की कोशिश की थी। लेकिन विभाग का यह अस्थाई और सतही जुगाड़ पहली ही भीषण गर्मी में पूरी तरह फेल साबित हुआ, जब तापमान बढ़ते ही डामर पिघलकर बह गया और दरारें फिर से अपने पुराने और डरावने रूप में बाहर आ गईं। इससे साफ पता चलता है कि संबंधित विभाग ने समस्या के मूल कारण को समझने और उसे ठीक करने के लिए कोई ठोस इंजीनियरिंग प्रयास नहीं किया है। सड़क धंसने की इस गंभीर समस्या के बीच हाईवे पर रोशनी की खराब व्यवस्था और रात के अंधेरे में इन छिपे हुए गड्ढों के कारण सफर और भी ज्यादा डरावना हो जाता है। हाईवे से लगातार गुजरने वाले ओवरलोडेड ट्रकों के भारी कंपन की वजह से पुल के जोड़ों में आई यह दरारें वक्त के साथ और चौड़ी होती जा रही हैं।

लीपापोती बंद कर आईआईटी स्तर की तकनीकी जांच कराने की उठी मांग

पुल की इस खतरनाक हालत को देखते हुए क्षेत्रीय जनता और वाहन चालकों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से मांग की है कि यहां केवल डामर की लीपापोती करने के बजाय फौरन उच्च स्तरीय इंजीनियरों की टीम को भेजा जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के इस तरह धंसने के पीछे इसके बुनियादी ढांचे या पिलर में कोई बड़ी तकनीकी खराबी हो सकती है, जिसकी गहराई से जांच होना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते इस मुख्य मार्ग और पुल की परमानेंट मरम्मत नहीं कराई गई, तो भविष्य में किसी बड़े और वीभत्स हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है। फोरलेन टोल रोड होने के बावजूद सफर की ऐसी जानलेवा स्थिति ने हाईवे अथॉरिटी के अधिकारियों की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने जल्द ही आधुनिक तकनीकों से इसका सुदृढ़ीकरण शुरू नहीं कराया, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। फिलहाल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुल के दोनों तरफ तत्काल मजबूत रिपेयरिंग कार्य शुरू करने की सख्त जरूरत है।