रोजगार के मुद्दे पर टीकाराम जूली ने सरकार को घेरा, उठाए कई गंभीर सवाल

जयपुर:राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सूबे की भाजपा सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार देने की इच्छाशक्ति पूरी तरह खत्म हो चुकी है, जिसकी वजह से आज का युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। जूली ने कहा कि बड़े-बड़े दावों और विज्ञापनों के बीच धरातल पर युवाओं के हाथ सिर्फ निराशा ही लग रही है।

लोन के लिए भटक रहे युवा, स्वरोजगार योजना फाइलों में दफन

टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना की जमीनी हकीकत को उजागर करते हुए कहा कि युवाओं को खुद का बिजनेस शुरू कराने के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। बैंकों की कछुआ चाल और लचर कार्यप्रणाली के कारण हजारों युवाओं के लोन आवेदन दफ्तरों की धूल फांक रहे हैं। हालत यह है कि कई जिलों में 30 फीसदी आवेदन भी बैंकों तक नहीं पहुंच पाए हैं। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की हाई-लेवल समीक्षा (उच्चस्तरीय जांच) की जाए और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।

'राइजिंग राजस्थान' पर सवाल— 83% से ज्यादा प्रोजेक्ट्स सिर्फ कागजों पर!

इन्वेस्टमेंट के बड़े-बड़े दावों को घेरते हुए नेता प्रतिपक्ष ने 'राइजिंग राजस्थान' अभियान को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सरकारी आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जितने एमओयू (MOU) साइन किए गए, उनमें से केवल 3,895 परियोजनाओं पर ही जमीनी काम शुरू हो सका है। बाकी की 83 प्रतिशत से अधिक योजनाएं आज भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। जूली ने सरकार को नसीहत दी कि इवेंट और प्रचार आधारित राजनीति छोड़कर सरकार को असलियत में फैक्ट्रियां लगाने और युवाओं के लिए नौकरियां पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए।

पचपदरा रिफाइनरी में देरी से लाखों युवाओं का नुकसान

रोजगार के मुद्दे पर टीकाराम जूली ने पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सिर्फ राजनीतिक नफा-नुकसान के चक्कर में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अधर में लटकाए रखा। अगर यह रिफाइनरी समय पर पूरी हो जाती, तो आज राजस्थान के लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल चुका होता।

घोषणाओं से पेट नहीं भरता: जूली

बयान के आखिर में नेता प्रतिपक्ष ने साफ लहजे में कहा कि राजस्थान का युवा अब सरकार के हवाई वादों और खोखली घोषणाओं के बहकावे में आने वाला नहीं है। उन्हें कागजी आंकड़ों के बजाय धरातल पर काम और रोजगार के ठोस अवसर चाहिए।