रायपुर : आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान अब कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। इसी तरह विकासखंड पिथौरा के ग्राम सलडीह के प्रगतिशील किसान धनेश्वर साव जिन्होंने अपनी धान की फसल में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्लस का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर बेहतर परिणाम हासिल किए हैं। साव ने बताया कि उन्होंने बीज उपचार से लेकर पौध उपचार और फसल की वृद्धि अवस्था तक नैनो उर्वरकों का नियमानुसार प्रयोग किया। इसके परिणामस्वरूप धान की फसल अधिक हरी-भरी, स्वस्थ एवं मजबूत विकसित हुई। फसल में रोग एवं कीटों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम देखने को मिला, जिससे अतिरिक्त कीटनाशकों की आवश्यकता कम हुई और खेती की लागत में कमी आई। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों को अन्य उपयुक्त कीटनाशकों के साथ मिलाकर छिड़काव करने से समय और मजदूरी दोनों की बचत हुई। इससे कृषि कार्य अधिक सुविधाजनक और किफायती बन गया। फसल की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला, जिससे बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है।
साव ने धान की बुवाई से पूर्व बीजों का नैनो डीएपी से उपचार किया। इसके लिए प्रति किलोग्राम बीज में 5 एमएल नैनो डीएपी का उपयोग किया गया। वहीं रोपाई से पहले पौधों की जड़ों को नैनो डीएपी घोल में उपचारित किया गया। फसल की 30 से 35 दिन की अवस्था में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्लस का संयुक्त छिड़काव किया गया, जबकि दूसरा छिड़काव फूल आने से पहले पोटरी पानी अवस्था में नैनो यूरिया प्लस से किया गया। इन उपायों से फसल को आवश्यक पोषक तत्व समय पर प्राप्त हुए और पौधों की वृद्धि बेहतर हुई। प्रगतिशील किसान धनेश्वर साव का अनुभव क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग न केवल उत्पादन बढ़ाने में सहायक है, बल्कि उर्वरक उपयोग दक्षता में वृद्धि कर खेती की लागत भी कम करता है। अधिकांश कीटनाशकों के साथ इनका मिश्रण संभव है, जिससे श्रम और समय की बचत होती है। हालांकि कॉपर युक्त कीटनाशकों एवं फफूंदनाशकों के साथ इनका उपयोग नहीं करना चाहिए।

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