पुणे। पोर्शे कार दुर्घटना मामले के नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। पुणे पुलिस ने उनकी जमानत रद्द कराने के लिए अदालत का रुख किया है। पुलिस का दावा है कि विशाल अग्रवाल ने देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा दी गई राहत की शर्तों का साफ तौर पर उल्लंघन किया है। सरकारी वकील के माध्यम से शिवाजीनगर सत्र न्यायालय में यह याचिका दायर की गई है, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होने के आसार हैं। यह पूरी कानूनी कवायद सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो के बाद शुरू हुई है, जिसमें विशाल अग्रवाल अपने परिजनों के साथ जश्न के माहौल में नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद आम जनता में भारी आक्रोश देखा गया और जांच व्यवस्था पर भी उंगलियां उठीं।
वीडियो पर पुलिसिया कार्रवाई और अभियोजन पक्ष के तर्क
इंटरनेट पर वीडियो के प्रसारित होने के बाद पुणे पुलिस के आला अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कदम उठाने के निर्देश दिए। राज्य के विधि विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद पुलिस ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अभियोजन पक्ष का कहना है कि गंभीर आरोपों में जमानत मिलने के बाद इस प्रकार सार्वजनिक रूप से उत्सव मनाना मामले से जुड़े गवाहों को डराने या प्रभावित करने जैसा है। पुलिस का तर्क है कि इस व्यवहार से गवाहों पर मानसिक दबाव बन सकता है, जो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तों का सीधा उल्लंघन है।
अग्रवाल परिवार की सफाई और वीडियो की हकीकत
दूसरी तरफ, आरोपी के परिवार और उनके वकीलों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए वीडियो को पुराना करार दिया है। विशाल अग्रवाल की कानूनी टीम द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि यह वीडियो वर्तमान का नहीं बल्कि साल 2023 का है, जब वे गोवा के एक होटल में अपनी शादी की 25वीं वर्षगांठ मना रहे थे। उन्होंने दावा किया कि इस पारिवारिक आयोजन का मई 2024 में पुणे के यरवदा थाने में दर्ज हुए सड़क हादसे से कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस ने इस संबंध में विशाल अग्रवाल और उनकी पत्नी के बयान भी दर्ज किए हैं, जिन्हें डिजिटल साक्ष्यों के साथ कोर्ट में रखा जाएगा। अदालत ने फिलहाल आरोपी पक्ष को इस याचिका पर अपना आधिकारिक जवाब सौंपने को कहा है।
क्या है पूरा पोर्शे कार हादसा मामला
यह विवाद 19 मई 2024 की रात से जुड़ा है, जब पुणे के कल्याणी नगर क्षेत्र में एक तेज रफ्तार पोर्शे कार ने मोटरसाइकिल सवार दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को कुचल दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि उस वक्त कार विशाल अग्रवाल का नाबालिग बेटा चला रहा था। विशाल अग्रवाल को इस मामले में खून के नमूनों की हेराफेरी करने और सबूत मिटाने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि बेटे को कानूनी शिकंजे से बचाने के लिए ससून अस्पताल में उसके ब्लड सैंपल को उसकी मां के सैंपल से बदल दिया गया था ताकि शराब पीने की पुष्टि न हो सके। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मार्च के महीने में विशाल अग्रवाल को जमानत की मंजूरी दी थी।

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