फर्जी वीडियो विवाद पर AAP का शिअद के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन, सड़कों पर उतरेंगे कार्यकर्ता

चंडीगढ़। पंजाब के राजनीतिक गलियारों में गरमाए माहौल के बीच सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने शनिवार को पूरे राज्य में व्यापक मोर्चेबंदी करने का ऐलान किया है। पार्टी द्वारा यह राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन मुख्य विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल और उसके वरिष्ठ नेता सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के एक जाली (फर्जी) वीडियो को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर प्रसारित कर उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से गलत और भ्रामक प्रचार किया जा रहा है, जिससे उनकी और सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।

भ्रामक प्रचार के विरुद्ध सड़कों पर उतरेंगे कार्यकर्ता

इस कथित दुष्प्रचार के विरोध में आम आदमी पार्टी के तमाम बड़े नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकजुट होकर पूरे सूबे में सड़कों पर उतरने की तैयारी कर चुके हैं। पार्टी की ओर से जारी रणनीतिक योजना के अनुसार, राज्य के सभी प्रमुख और संवेदनशील केंद्रों पर यह विरोध प्रदर्शन सुबह 10:00 बजे से 11:00 बजे के बीच एक साथ शुरू किया जाएगा। इस दौरान सरकार के समर्थक विभिन्न चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर एकत्रित होकर विपक्षी दल की नीतियों और इस कृत्य के खिलाफ अपना कड़ा आक्रोश दर्ज कराएंगे।

महानगरों सहित सभी जनपदों में सघन मोर्चेबंदी

विपक्ष को घेरने के लिए सत्ताधारी दल ने व्यापक स्तर पर अपनी तैयारियां मुकम्मल कर ली हैं। विशेष रूप से जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला, बठिंडा और मोहाली जैसे बड़े तथा राजनीतिक रूप से सक्रिय महानगरों में विशेष प्रदर्शन किए जाएंगे। इन बड़े शहरों के अतिरिक्त पंजाब के सभी छोटे-बड़े जिलों और कस्बों में भी स्थानीय विधायकों और सांगठनिक प्रभारियों की देखरेख में विरोध मार्च निकालने की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसके चलते पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

शांति व्यवस्था और विपक्षी दावों के बीच बढ़ता सियासी तनाव

मुख्यमंत्री के वीडियो विवाद ने पंजाब की सियासत में एक नया उबाल ला दिया है, जिसके कारण दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच वाकयुद्ध और तल्खी चरम पर पहुंच गई है। जहां एक तरफ 'आप' इसे मुख्यमंत्री की साख को बट्टा लगाने की एक सोची-समझी साजिश करार दे रही है, वहीं दूसरी तरफ अकाली दल और विरोधी खेमा इन आरोपों पर अपनी अलग दलीलें पेश कर रहा है। शनिवार को होने वाले इस एक घंटे के सांकेतिक प्रदर्शन को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।