नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के मौजूदा दायरे में फिलहाल किसी भी तरह का फेरबदल नहीं किया जाएगा। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 42वीं बैठक में इसके वर्तमान स्वरूप को ही बनाए रखने की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही, आने वाले समय में शहरीकरण को बेहतर रूप देने के लिए चार नए अत्याधुनिक 'नमो सिटी' मॉडल शहर बसाने की रूपरेखा तैयार करने का बड़ा फैसला लिया गया है। इस उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री समेत दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान हरियाणा की तरफ से एनसीआर के दायरे को दिल्ली के राजघाट से केवल 100 किलोमीटर के हवाई क्षेत्र तक ही सीमित करने का सुझाव रखा गया था, जिसे मंजूरी मिलने पर एनसीआर का तकरीबन 60 फीसदी हिस्सा बाहर हो जाता। मगर, बोर्ड ने इस मांग को खारिज करते हुए पुरानी सीमाओं को ही बरकरार रखा है।
चार नए 'नमो सिटी' से बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर
इस बैठक का सबसे अहम फैसला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में चार नए 'नमो सिटी' विकसित करने को लेकर रहा। इस योजना के अंतर्गत दिल्ली समेत हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से एक-एक ग्रीनफील्ड टाउनशिप की योजना का खाका मांगा गया है। इन चारों राज्यों से प्रस्ताव मिलने के बाद बेहद आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस नए शहरों का निर्माण किया जाएगा। इन नए शहरों को इस तरह तैयार किया जाएगा जहां उन्नत बुनियादी ढांचा, शानदार ट्रांसपोर्ट सिस्टम, डिजिटल सेवाएं और पर्यावरण के अनुकूल सस्टेनेबल मॉडल मौजूद हों। इस पहल से एनसीआर के पुराने और बड़े शहरों पर लगातार बढ़ रहे आबादी के बोझ, ट्रैफिक की समस्या और प्रदूषण से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही व्यापार और रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।
एनसीआर के दायरे को लेकर आगे की योजना और समय सीमा
भले ही मौजूदा सीमाओं में बदलाव को टाल दिया गया हो, लेकिन एनसीआर की सीमाओं के पुनर्गठन को लेकर मंथन जारी रहेगा। इसके लिए एक विशेष उप-समिति का गठन किया गया है, जो अगस्त 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद दिसंबर 2026 में होने वाली आगामी समीक्षा बैठक के दौरान सीमा के पुनर्गठन पर एक बार फिर विचार-विमर्श किया जाएगा। स्पष्ट है कि अभी एनसीआर के क्षेत्रफल में कोई कटौती नहीं की जा रही है, बल्कि 'नमो सिटी' के जरिए इसके विकास को नया विस्तार देने की तैयारी है।
प्रदूषण और संतुलित विकास के लिए साझा रणनीति पर जोर
क्षेत्र के चहुंमुखी विकास के लिए बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने सभी भागीदार राज्यों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करने की वकालत की। चर्चा के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि दिल्ली पर आबादी के बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए जनसुविधाओं और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके अतिरिक्त, एनसीआर के सामने खड़ी प्रदूषण की साझा चुनौती से निपटने के लिए दीर्घकालिक और ठोस नीतियां बनाने पर जोर दिया गया। पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल, समान नियमों को लागू करने, बड़े स्तर पर पौधारोपण करने और हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) को तेजी से बढ़ाने का आह्वान किया गया ताकि पूरे क्षेत्र को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सके।

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