नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली और पेपर लीक के गंभीर मामलों को लेकर मंगलवार को केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न लेकर मोदी सरकार अपनी जवाबदेही की पहली परीक्षा में ही पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। खरगे ने आगामी 21 जून को आयोजित होने वाली नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा से ठीक पहले सरकार द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर पाबंदी लगाने के फैसले की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि सरकार को टेलीग्राम ब्लॉक करने के बजाय उन शिक्षा मंत्री को उनके पद से हटा देना चाहिए, जिन्होंने अपनी अकर्मण्यता से देश के करोड़ों नौजवानों का भविष्य ही ब्लॉक कर दिया है।
असली गुनाहगारों को बचाने के लिए छोटे मोहरों पर कार्रवाई
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की मंशा पर गहरे सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि यह पूरी कवायद मुख्य आरोपियों और बड़े चेहरों को संरक्षण देने की एक सोची-समझी कोशिश है। उन्होंने कहा कि कभी वायुसेना की सहायता लेना, कभी टेलीग्राम ऐप पर प्रतिबंध मढ़ना तो कभी पेपर लीक कराने वाले असली माफिया को सुरक्षित रखने के लिए छोटे-मोटे किरदारों को गिरफ्तार करना, अब मोदी सरकार की राजनैतिक मजबूरी बन चुका है। खरगे ने डराने वाले आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि बीते एक दशक में देश के अलग-अलग हिस्सों में कुल 90 बार पेपर लीक होने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस महाघोटाले और फैले भ्रष्टाचार के चलते देश के तकरीबन नौ करोड़ युवाओं को भारी मानसिक और आर्थिक बर्बादी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि आखिर कब तक वह अपनी इन प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने का प्रयास करती रहेगी।
यूपीएससी और सीबीएसई जैसी संस्थाओं की साख पर लगा बट्टा
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे ने इन परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों के बेहद दर्दनाक और सामाजिक परिणामों का जिक्र भी किया। उन्होंने बेहद दुख जताते हुए दावा किया कि लगातार होती धोखाधड़ी से निराश होकर करीब आधा दर्जन प्रतिभावान छात्र आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने को विवश हो चुके हैं, लेकिन देश के शीर्ष नेतृत्व ने इस अति-संवेदनशील विषय पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय माता-पिता कर्ज के बोझ तले दबकर अपने बच्चों को वर्षों तक परीक्षाओं की तैयारी करवाते हैं, मगर अंत में नीट, एसएससी, यूजीसी-नेट और सीयूईटी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो जाते हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि सीबीएसई के परिणामों में भी बड़े स्तर पर विसंगतियां पाई गईं, जिन्हें खुद होनहार विद्यार्थियों ने सामने लाया। अब तो देश की सबसे विश्वसनीय मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षाओं पर भी गंभीर उंगलियां उठने लगी हैं।
छात्रों को एकजुट करने के लिए राहुल गांधी संभालेंगे कमान
नीट पेपर लीक विवाद, परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई धांधली और सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग में आई विसंगतियों को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। अब इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को और अधिक आक्रामक बनाने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी खुद मोर्चे पर उतरने जा रहे हैं। राहुल गांधी आगामी 17 जून से राजस्थान के कोचिंग हब कहे जाने वाले कोटा शहर से देशव्यापी छात्र सम्मेलनों की शुरुआत करेंगे। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य पेपर लीक और शैक्षणिक व्यवस्था में पनपे भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरे देश के छात्र संगठन और युवा समुदाय को एक मंच पर लाना है, ताकि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की घेराबंदी को और मजबूत किया जा सके।

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