इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात एक बार फिर पूरी तरह बेकाबू हो गए हैं। नागरिक समाज के प्रमुख संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में भयंकर जन-आक्रोश फूट पड़ा है। आज मंगलवार को बुलाए गए पूर्ण क्षेत्र बंद (शटर-डाउन और चक्का जाम) से ठीक पहले रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई भीषण हिंसक झड़पों में कम से कम 11 लोगों की जान चली गई है, जबकि 70 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इलाके में बने अत्यधिक तनाव को देखते हुए एक बार फिर बड़े बवाल की आशंका पैदा हो गई है।
मुर्दाघर के बाहर भड़की हिंसा, लॉन्ग मार्च पर रोक
यह ताजा और भयानक हिंसा उस वक्त भड़की जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) के मुर्दाघर के बाहर इकट्ठा हुए थे। वहां इससे पहले हुई एक गोलीबारी में मारे गए संगठन के एक कार्यकर्ता का शव रखा गया था। प्रशासन ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत पिछले हफ्ते ही इस नागरिक संगठन को प्रतिबंधित घोषित किया था, जिससे लोग पहले से ही गुस्से में थे।
अपनी पूर्व घोषित योजना के मुताबिक, संगठन ने दक्षिणी जिले भिंबर से एक 'लॉन्ग मार्च' शुरू करने का ऐलान किया है, जो विभिन्न जिलों से होते हुए विधानसभा के बाहर एक अनिश्चितकालीन धरने में तब्दील होना है। हालांकि, मुजफ्फराबाद प्रशासन ने इस मार्च पर पूरी तरह रोक लगा दी है और अब तक 200 से अधिक प्रदर्शनकारियों व नेताओं को हिरासत में लिया जा चुका है।
रावलकोट में गोरिल्ला युद्ध जैसे हालात, जान बचाकर भागे डॉक्टर्स
रावलकोट में स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है। रविवार आधी रात को उग्र प्रदर्शनकारियों ने कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल का रास्ता रोककर उसे पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया, जिसके कारण डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक:
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पेट्रोल बम से हमले: उपद्रवियों ने तंग गलियों में छिपकर 'गोरिल्ला युद्ध' की तर्ज पर सुरक्षाकर्मियों पर पेट्रोल बम, पत्थरों और अत्याधुनिक हथियारों से घात लगाकर हमले किए।
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हताहतों की संख्या: पुंछ सेक्टर के कमिश्नर ने पुष्टि की है कि इस भीषण गोलीबारी में 4 पुलिसकर्मी, 1 राहगीर और जवाबी कार्रवाई में 6 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं।
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घायलों की स्थिति: पुलिस प्रमुख के अनुसार, झड़पों में 23 सुरक्षाकर्मी और 50 प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि, स्थानीय सूत्रों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि मरने वाले आम नागरिकों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है।
क्यों गुस्से में हैं PoK के लोग? (विवाद की मुख्य वजहें)
इस बड़े जन-आक्रोश और हिंसक प्रदर्शनों के पीछे मुख्य रूप से राजनीतिक और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं:
शरणार्थी सीटों का विवाद: जनता के गुस्से की सबसे मुख्य वजह 45 सदस्यों वाली PoK विधानसभा में उन शरणार्थियों के लिए 12 सीटें आरक्षित करने का सरकारी फैसला है, जो कश्मीर से बाहर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों (जैसे पंजाब या सिंध) में रहते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह फैसला उनके अपने लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करने और इस्लामाबाद के हस्तक्षेप को बढ़ाने की एक साजिश है।
महंगाई और बदहाली: इसके अलावा, पिछले दो सालों से स्थानीय लोग आटे की आसमान छूती कीमतों, बिजली की भारी किल्लत व भारी-भरकम बिलों, रिकॉर्ड बेरोजगारी और बदहाल गवर्नेंस के खिलाफ भी सड़कों पर हैं। सरकार द्वारा इन बुनियादी मांगों को दबाने के लिए बल प्रयोग करने से यह आंदोलन अब एक हिंसक विद्रोह का रूप ले चुका है।

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