जोधपुर | राजस्थान की जोजरी-लूनी नदी प्रणाली में लगातार बढ़ते प्रदूषण के गंभीर मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जोधपुर के निकट जोजरी नदी में बिना ट्रीटमेंट के फैक्ट्रियों का जहरीला पानी (औद्योगिक अपशिष्ट) बहाने के लिए बनाई गई करीब 4 किलोमीटर लंबी गुप्त भूमिगत पाइपलाइन का भंडाफोड़ होने के बाद अदालत ने सख्त लहजे में पूछा कि आखिर “यह सब किसकी शह पर चल रहा था?” न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि इतनी बड़ी अवैध व्यवस्था उद्योगों, सीईटीपी (CETP) संचालकों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मिलीभगत के बिना इतने लंबे समय तक कैसे संचालित हो सकती है।
राज्य सरकार ने कोर्ट को दी कार्रवाई की जानकारी, 306 उद्योग बंद
अदालती कड़े रुख के बीच राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट को बताया कि 27 मई को हुए औचक निरीक्षण में इस बड़ी चूक का खुलासा होते ही प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया था। इस मामले में जयपुर से एक विशेष जांच टीम जोधपुर भेजी गई, जिसके बाद लापरवाही बरतने के आरोप में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया और कई वरिष्ठ अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया है। सरकार ने पीठ को अवगत कराया कि जोधपुर सीईटीपी से जुड़ीं सभी 306 टेक्सटाइल फैक्ट्रियों को तुरंत प्रभाव से बंद करा दिया गया है और जांच पूरी होने तक सीईटीपी प्लांट के संचालन पर भी रोक लगा दी गई है।
सीबीआई (CBI) जांच की जगह वरिष्ठ आईपीएस के नेतृत्व में बनेगी एसआईटी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बड़े पर्यावरण घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने के स्पष्ट संकेत दिए थे। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की देखरेख में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर दर्ज करने का पुख्ता भरोसा दिए जाने के बाद कोर्ट ने फिलहाल सीबीआई जांच का विचार टाल दिया। अदालत ने साफ लफ्जों में कहा कि इस अवैध नेटवर्क को चलाने में शामिल हर स्तर के अधिकारियों और उद्यमियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त आपराधिक व आर्थिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
मानसून से पहले जहरीले स्लज का वैज्ञानिक निस्तारण करने की चेतावनी
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई से जुड़ीं राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा ने अदालत को आश्वस्त किया कि विभाग किसी भी प्रकार के पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की समीक्षा के लिए गठित समिति की उस रिपोर्ट पर तीव्र चिंता व्यक्त की, जिसमें जोजरी-बांडी-लूनी नदी तंत्र में भारी मात्रा में जहरीला कीचड़ (स्लज) जमा होने की बात कही गई है। समिति ने आगाह किया है कि अगर आगामी मानसून की बारिश से पहले इस जहरीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया गया, तो यह प्रदूषण पूरे क्षेत्र के भूजल, कृषि भूमि और जनजीवन को तबाह कर सकता है। इस मामले में शीर्ष अदालत अगली सुनवाई के दौरान अपना विस्तृत आदेश जारी कर सकती है।

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