पटना: बिहार की सियासत में पिछले कई दिनों से जारी मंत्रिमंडल विस्तार का इंतज़ार आज खत्म हो गया। राजभवन में नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के साथ ही नीतीश सरकार के स्वरूप की तस्वीर साफ हो गई है। माना जा रहा है कि अगर कोई बड़ी राजनीतिक हलचल नहीं हुई, तो यह इस कार्यकाल का अंतिम शपथ ग्रहण समारोह है। अब सबकी निगाहें विभागों के बंटवारे पर टिकी हैं, जिसकी अधिसूचना आज देर रात तक जारी होने की संभावना है। इस बार के विस्तार में संख्या बल के हिसाब से भाजपा ने जदयू पर बढ़त बना ली है, जहाँ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ भाजपा के 16 मंत्री हैं, वहीं जदयू की संख्या दो उपमुख्यमंत्रियों सहित 15 रह गई है।
सत्ता के समीकरण और सहयोगियों का हिस्सा
गठबंधन सरकार में सीटों के गणित को देखें तो चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (आर) तीन मंत्री पदों की उम्मीद कर रही थी, लेकिन अंततः उन्हें दो ही पदों से संतोष करना पड़ा। वहीं 'हम' (HAM-S) और रालोमो (RLMO) को पहले की तरह एक-एक मंत्री पद दिया गया है। विभागों के वितरण की जिम्मेदारी मुख्य रूप से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के कंधों पर है। सम्राट चौधरी अपने पास मौजूद 29 विभागों में से भाजपा और अन्य छोटे सहयोगियों के मंत्रियों को विभाग सौंपेंगे, जबकि नीतीश कुमार जदयू कोटे के 18 विभागों को अपने 13 नए मंत्रियों के बीच वितरित करेंगे।
पावर सेंटर और गृह विभाग पर छिड़ा घमासान
बिहार सरकार में सबसे अधिक चर्चा 'पावर सेंटर' को लेकर है। राज्य में सामान्य प्रशासन और गृह विभाग को सबसे शक्तिशाली माना जाता है क्योंकि इनका सीधा नियंत्रण प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर होता है। लंबे समय से गृह विभाग को लेकर सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के बीच खींचतान की खबरें आ रही हैं। वर्तमान में गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास है, लेकिन इसे विजय कुमार सिन्हा को सौंपने की बात पर पेंच फंसा हुआ है। आज होने वाले विभागों के बंटवारे में यह साफ हो जाएगा कि सत्ता का असली रिमोट कंट्रोल किसके पास रहता है और क्या मुख्यमंत्री अपने पास से इस महत्वपूर्ण विभाग को छोड़ते हैं या नहीं।
जदयू का आंतरिक बदलाव और नई रणनीति
जनता दल यूनाइटेड के भीतर भी विभागों को लेकर काफी मंथन चल रहा है। जदयू कोटे के 18 विभागों को संतुलित करने के लिए नीतीश कुमार ने संजय झा और ललन सिंह के साथ लंबी बैठक की है। पार्टी के भीतर निशांत कुमार को कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की चर्चा जोरों पर है। इसके लिए पुराने दिग्गज बिजेंद्र प्रसाद यादव के कुछ विभाग कम किए जा सकते हैं, हालांकि उनके अनुभव को देखते हुए ऊर्जा और वित्त जैसे विभाग उनके पास ही रहने की उम्मीद है। दूसरी ओर, भाजपा ने मंगल पांडेय जैसे पुराने चेहरों को हटाकर बड़े उलटफेर के संकेत दिए हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि नई कैबिनेट में काम करने के अंदाज़ और चेहरों में बड़ा बदलाव दिखने वाला है।

More Stories
पंजाब धमाके मामले में BJP का भगवंत मान पर पलटवार, भेजा मानहानि नोटिस
ऑपरेशन सिंदूर देश के संकल्प और शक्ति का प्रतीक: रक्षामंत्री
‘118 विधायक दिखाओ, तभी शपथ होगी’: तमिलनाडु के राज्यपाल ने विजय को लौटाया