कोरबा। भीषण आंधी-तूफान ने शहर के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। कुसमुंडा के वार्ड क्रमांक 20, नेहरू नगर और बांकीमोंगरा में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला, जहाँ विशालकाय बरगद और पीपल के पेड़ तीन मकानों पर धराशायी हो गए। इस भयावह हादसे के दौरान तीनों परिवारों के सदस्य घरों के भीतर ही मौजूद थे, जो चमत्कारिक रूप से बाल-बाल बच गए।
हादसे के बाद मची अफरा-तफरी और बचाव
तेज आवाज के साथ पेड़ गिरने से पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े। मलबे और पेड़ों की टहनियों के बीच फंसे जोहन पटेल, नारायण कुमार और जानकी धीवर के परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि किसी की जान नहीं गई, लेकिन इस आकस्मिक घटना ने परिवारों को गहरे सदमे और दहशत में डाल दिया है।
सालों की पूंजी हुई जमींदोज
पेड़ गिरने से तीनों मकानों की छतें और दीवारें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे घर के भीतर रखा सारा कीमती सामान बर्बाद हो गया है। पीड़ित जोहन पटेल ने भर्राए गले से बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से यहाँ रह रहे थे और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक पल में उनका आशियाना इस तरह उजड़ जाएगा। अब ये परिवार खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं।
प्रशासन से मुआवजे और मदद की गुहार
पीड़ित जानकी धीवर ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि बिजली कड़कने और बारिश के कारण सभी अंदर थे, तभी अचानक मौत बनकर पेड़ गिर पड़ा। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन को सूचित कर दिया गया है। बेघर हुए परिवारों ने सरकार से तत्काल सहायता, पटवारी द्वारा नुकसान का सटीक आंकलन और उचित मुआवजे की मांग की है ताकि वे अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकें।

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