प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज: क्या है यह?
जब कोई कर्जदार अपने लोन को उसकी निर्धारित अवधि (Tenure) पूरी होने से पहले ही आंशिक (Partial) या पूर्ण (Full) रूप से चुका देता है, तो बैंक उस पर एक शुल्क लगाते हैं, जिसे प्री-पेमेंट चार्ज कहते हैं। चूँकि कर्ज जल्दी चुकाने से बैंकों को भविष्य में मिलने वाले ब्याज का नुकसान होता है, वे इसकी भरपाई इस शुल्क के जरिए करते हैं।
RBI के नियम: कब देना होगा शुल्क और कब नहीं?
1. फ्लोटिंग रेट लोन (पूरी तरह निशुल्क)
आरबीआई के निर्देशों के अनुसार, यदि आपने फ्लोटिंग ब्याज दर (बदलती दरों) पर होम लोन या व्यक्तिगत उद्देश्यों के लिए कोई ऋण लिया है, तो बैंक आपसे कोई भी प्री-पेमेंट पेनाल्टी नहीं वसूल सकते। आप जब चाहें, बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपना लोन बंद कर सकते हैं।
2. फिक्स्ड रेट लोन (पारदर्शिता का नियम)
स्थिर ब्याज दर (Fixed Rate) वाले लोन पर बैंक शुल्क ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए शर्तें हैं:
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लोन समझौते (Agreement) में इस शुल्क का पहले से उल्लेख होना अनिवार्य है।
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बैंक अपनी मर्जी से बाद में अचानक इस शुल्क को बढ़ा नहीं सकते।
नए नियम और राहत (1 जनवरी 2026 से प्रभावी)
आरबीआई ने कर्जदारों के हितों की रक्षा के लिए नियमों को और सख्त और पारदर्शी बनाया है:
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व्यावसायिक ऋण: व्यक्तियों और MSME को दिए गए फ्लोटिंग रेट बिजनेस लोन पर अब कोई प्री-पेमेंट शुल्क नहीं लगेगा।
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स्मॉल फाइनेंस और ग्रामीण बैंक: 50 लाख रुपये तक के कर्ज पर प्री-पेमेंट पेनाल्टी लगाने पर रोक रहेगी।
लोन क्लोजर प्रक्रिया: अब और भी आसान
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दस्तावेजों की वापसी: लोन पूरी तरह चुकता होने के 30 दिनों के भीतर बैंक को आपके सभी ओरिजिनल पेपर (जैसे रजिस्ट्री आदि) वापस करने होंगे।
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विलंब पर जुर्माना: यदि बैंक 30 दिनों में दस्तावेज नहीं लौटाता, तो उसे ग्राहक को 5,000 रुपये प्रतिदिन का हर्जाना देना होगा।
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स्पष्टता: लोन देते समय ही बैंक को सभी 'छिपे हुए शुल्कों' (Hidden Charges) की जानकारी लिखित में देनी होगी।

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