भोपाल : भोपाल में मध्य प्रदेश विधानसभा का यह विशेष सत्र काफी गरमागरम रहा, जहाँ एक तरफ 'नारी शक्ति वंदन' (महिला आरक्षण) जैसे गंभीर विषय पर वैचारिक जंग छिड़ी, तो दूसरी तरफ किसानों के मुद्दों को लेकर प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।
1. विधानसभा के बाहर का ड्रामा: ट्रैक्टर और गेहूं का गट्ठा
कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह का ट्रैक्टर लेकर विधानसभा पहुंचना एक बड़ा राजनीतिक संदेश था, जिसे पुलिस ने बीच में ही रोक दिया। विधायक का दावा है कि उनके पास ट्रैक्टर ले जाने का आधिकारिक पास था, जबकि पुलिस ने सुरक्षा कारणों और नियमों का हवाला देते हुए इसे मंत्रालय के पास ही रोक दिया।पुलिस और विधायक के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। ट्रैक्टर रुकने के बावजूद विधायक पीछे नहीं हटे और गेहूं का गट्ठा सिर पर रखकर पैदल ही सदन के भीतर पहुंच गए, जो किसानों की समस्याओं की ओर ध्यान खींचने का एक तरीका था।
2. सदन के भीतर 'नारी शक्ति' पर वार-पलटवार
महिला आरक्षण बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई:
विपक्ष (कांग्रेस) का पक्ष:
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राजेंद्र सिंह ने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे केवल एक "चुनावी स्टंट" करार दिया।
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उनका तर्क था कि यह बिल केवल पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राजनीतिक लाभ लेने और ममता बनर्जी जैसी महिला नेताओं के प्रभाव को कम करने के लिए लाया गया है।
सत्ता पक्ष (भाजपा) का पक्ष:
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मंत्री कृष्णा गौर ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्ष ने बार-बार इस बिल में अड़ंगा डालकर देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं को तोड़ा है।
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उन्होंने "Ubi jus, ibi remedium" (जहाँ अधिकार है, वहाँ उपचार है) के कानूनी सिद्धांत का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों की सराहना की और इसे महिलाओं के अपमान का बदला बताया।

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