नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों द्वारा पाला बदलने की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय सिंह ने इसे भाजपा का 'ऑपरेशन लोटस' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपनी पुरानी रणनीति के तहत जांच एजेंसियों का डर दिखाकर 'आप' के सांसदों को तोड़ा है।
"पीठ में छुरा घोंपा": राघव चड्ढा पर व्यक्तिगत हमला
संजय सिंह ने राघव चड्ढा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिस पार्टी ने उन्हें कम उम्र में सम्मान और बड़ी जिम्मेदारियां दीं, उन्होंने उसी के साथ विश्वासघात किया है।
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भ्रष्टाचार और समझौता: संजय सिंह के अनुसार, बागी सांसदों ने जांच एजेंसियों के दबाव में आकर घुटने टेक दिए हैं।
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सवालिया निशान: उन्होंने सवाल किया कि सांसद रहते हुए राघव चड्ढा ने पंजाब के हित में क्या किया? उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला केवल निजी स्वार्थ और डर की वजह से लिया गया है।
पंजाब सरकार को अस्थिर करने की साजिश
संजय सिंह ने भावुक अपील करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान पंजाब के विकास के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं, लेकिन भाजपा ED और CBI के दम पर उनकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है।
"यह केवल सांसदों का जाना नहीं है, बल्कि पंजाब के उन लाखों मतदाताओं का अपमान है जिन्होंने ईमानदारी की राजनीति को चुना था।"
7 सांसदों की बगावत: 'आप' के लिए अस्तित्व का संकट?
संजय सिंह ने दावा किया कि भाजपा ने 'साम-दाम-दंड-भेद' अपनाकर 'आप' के कुल 7 सांसदों को अपने पाले में कर लिया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का चीरहरण बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी इस धोखे से और मजबूत होकर उभरेगी और जनता आने वाले चुनावों में इस 'खरीद-फरोख्त' का मुंहतोड़ जवाब देगी।
क्या था राघव चड्ढा का दांव?
गौरतलब है कि राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की थी कि राज्यसभा में 'आप' के दो-तिहाई सदस्य (संदीप पाठक और अशोक मित्तल समेत) संवैधानिक प्रावधानों का लाभ उठाते हुए भाजपा में विलय कर रहे हैं। इस तकनीकी दांव का मकसद उनकी सदस्यता को दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) से बचाना है।

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