वृंदावन नाव हादसा: 10 पर्यटकों की मौत, 5 लापता; 14 KM तक सर्च ऑपरेशन जारी

वृंदावन में यमुना नदी में हुए नाव हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। दरअसल अभी भी 5 पर्यटक लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) समेत 250 लोगों की टीम दूसरे दिन भी जुटी हुई है। यह दर्दनाक हादसा शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे केसी घाट पर हुआ था, जब 37 श्रद्धालुओं से भरी एक नाव अचानक पलट गई। हादसे के बाद यात्रियों को मरता छोड़कर फरार हुए नाव मालिक पप्पू निषाद को पुलिस ने 6 घंटे बाद रात 9 बजे गिरफ्तार कर लिया।

दरअसल नाव हादसे में रेस्क्यू किए गए लोगों की संख्या अब तक 22 है। अभी भी 5 लोग लापता हैं, जिनकी तलाश में जुटी 250 सदस्यीय टीम यमुना नदी में करीब 14 किलोमीटर के विशाल दायरे में सघन अभियान चला रही है। रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे अफसरों ने बताया कि लापता लोगों को ढूंढना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

रेत में भी शव दबे होने की आशंका

यमुना नदी का बहाव इस समय काफी तेज है, जिसके कारण हादसे का शिकार हुए लोग बहकर काफी दूर तक जा सकते हैं। इसके अलावा, नदी के तल में मौजूद गाद यानी कीचड़ और रेत में भी शव दबे होने की आशंका है, जिससे उनकी पहचान और खोज मुश्किल हो रही है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आमतौर पर 24 घंटे बाद शव फूलकर पानी की सतह पर ऊपर आ जाते हैं, जिससे उनकी तलाश में कुछ आसानी हो सकती है। यह दर्दनाक हादसा बांके बिहारी मंदिर से महज 2 किलोमीटर दूर स्थित केसी घाट पर हुआ था, जहां पानी की गहराई 25 फीट तक बताई जा रही है।

कैसे हुआ हादसा?

हादसे में चमत्कारिक रूप से जिंदा बचे एक युवक ने पुलिस और प्रशासन को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उसने बताया कि नाव तट से करीब 50 फीट दूर यमुना नदी के बीच में थी। उस वक्त हवा की रफ्तार करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे थी, जिसने नाव को अचानक असंतुलित कर दिया। तेज हवा के थपेड़ों के कारण नाव डगमगाने लगी और उसे चला रहे नाविक पप्पू निषाद का नियंत्रण पूरी तरह छूट गया। युवक ने बताया कि नाव में सवार पर्यटकों ने नाविक से बार-बार कहा कि आगे पुल आने वाला है, वह नाव को रोक ले या किनारे ले चले, लेकिन नाविक ने उनकी एक न सुनी। नाव दो बार पीपा पुल से टकराने से बाल-बाल बची, लेकिन तीसरी बार वह पुल से सीधे टकरा गई और पलटकर गहरे पानी में डूब गई। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि नाव की क्षमता 40 श्रद्धालुओं की थी, लेकिन इसमें 37 लोग सवार थे। सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि नाविक ने किसी भी श्रद्धालु को लाइफ जैकेट नहीं दी थी, जिससे बचाव के मौके खत्म हो गए।

एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत

इस हृदयविदारक हादसे में एक ही परिवार के 7 लोगों की असमय मौत हो गई, जिससे पूरे परिवार में मातम पसरा है। मृतकों में मधुर बहल, उनकी मां कविता बहल, चाचा चरणजीत, चाची पिंकी बहल, बुआ आशा रानी, दूसरी बुआ अंजू गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी शामिल हैं। ये सभी श्रद्धालु पंजाब के लुधियाना जिले के जगराओं स्थित श्री बांके बिहारी क्लब की ओर से वृंदावन आए थे। क्लब द्वारा गुरुवार 9 अप्रैल को 2 बसों में कुल 130 श्रद्धालुओं को वृंदावन की 4 दिवसीय धार्मिक यात्रा पर भेजा गया था। इन 130 श्रद्धालुओं में से 90 जगराओं से थे, जबकि बाकी अन्य शहरों से आए थे। सभी श्रद्धालु शुक्रवार सुबह ही वृंदावन पहुंचे थे और दोपहर करीब 3 बजे यह हादसा हो गया, जिससे उनकी यह पवित्र यात्रा मौत की यात्रा में बदल गई।

कुल 10 शव बरामद किए जा चुके हैं

हादसे के तुरंत बाद, यमुना किनारे मौजूद पांटून पुल की मरम्मत कर रहे कुछ लोग और आस-पास के अन्य नाविक देवदूत बनकर सामने आए और उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर कुछ लोगों को बचाया। इसके बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं और बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि अब तक कुल 10 शव बरामद किए जा चुके हैं और 22 लोगों को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिया गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 8 टीमें, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 5 टीमें और प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC) की 3 बोट्स युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। इन टीमों के साथ 120 स्थानीय गोताखोर भी लापता लोगों की तलाश में रात-दिन जुटे हुए हैं। बचाव दल ने नदी में करीब 14 किलोमीटर आगे तक तलाशी अभियान चलाया है। प्रशासन अभी भी लापता लोगों की सही संख्या का मिलान कर रहा है, क्योंकि कुछ घायल श्रद्धालुओं को अलग-अलग निजी अस्पतालों में भी इलाज के लिए ले जाया गया है।