नई दिल्ली
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने निजी अस्पतालों द्वारा रोगियों की सर्जरी के सीधे प्रसारण पर हितधारकों और जनता से अगले 10 दिन में टिप्पणियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। आयोग ने सीधे प्रसारण के मुद्दे पर सिफारिशें देने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति भी बनाई है।
एनएमसी ने एक सार्वजनिक नोटिस में उच्चतम न्यायालय के समक्ष एक रिट याचिका का उल्लेख किया जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा है कि कई निजी अस्पताल रोगियों का इस्तेमाल व्यावसायिक रूप से कर रहे हैं और सम्मेलनों में लाइव सर्जरी प्रसारण के माध्यम से अपने गुप्त उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उन्हें मॉडल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
नोटिस में कहा गया, ''विभिन्न कंपनियां अपना प्रचार कर रही हैं और शोषित मरीजों की पीड़ा की कीमत पर पैसा कमा रही हैं। विज्ञापन प्रायोजन और पेशेवर दिखावा इन प्रसारणों के वास्तविक उद्देश्य पर हावी हो जाता है।''
इसमें कहा गया, ''स्वास्थ्य देखभाल केंद्र अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करते हैं, सर्जन अपने कौशल का प्रदर्शन करते हैं और कंपनियां रोगी की सुरक्षा की कीमत पर अपने उत्पादों का प्रचार करती हैं।''
इसके अनुसार सर्जरी के पहले से रिकॉर्ड किए गए और संपादित वीडियो शैक्षणिक जरूरतों को पूरा कर सकते हैं और कम जोखिम के साथ इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति कर सकते हैं।

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