भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच देश में एकजुटता और शांति की कामना को लेकर धार्मिक संगठनों की भूमिका भी सामने आने लगी है। ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड की अपील के बाद शुक्रवार को जुमा की नमाज के बाद बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर मस्जिदों से बाहर निकले और भारत की विजय और पाकिस्तान की शिकस्त के लिए खुले समर्थन का ऐलान किया।
भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच शुक्रवार को राजधानी भोपाल में जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय ने विशेष दुआ की। नमाज के बाद बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर मस्जिदों से बाहर निकले और भारत की विजय और पाकिस्तान की शिकस्त के लिए खुले समर्थन का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो देश के मुसलमान भी सरहद पर जाकर लड़ने को तैयार हैं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई "ऑपरेशन सिंदूर" के बाद यह पहला शुक्रवार था। लोगों ने भारत की सलामती, अमन और शांति के लिए सामूहिक रूप से दुआ की। इसके साथ ही कई स्थानों पर पाकिस्तान को करारा जवाब देने की भावना भी जाहिर की गई। इस आयोजन की पृष्ठभूमि में ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड की गुरुवार को की गई अपील भी अहम रही। बोर्ड ने देशभर की मस्जिदों के इमामों और समितियों से अनुरोध किया था कि 9 मई को जुमा की नमाज के बाद भारत की सुरक्षा, तरक्की और पाकिस्तान की हार के लिए दुआ की जाए। भोपाल के विभिन्न हिस्सों में जुमे की नमाज के बाद लोग तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारे लगाते हुए बाहर निकले। उनका कहना था कि देश सर्वोपरि है और इस संकट की घड़ी में हर नागरिक को एकजुट होकर सेना और सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए। इस माहौल में राष्ट्रहित में मुस्लिम समुदाय की यह पहल न सिर्फ राष्ट्रीय एकता का उदाहरण बनी, बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी दिया कि भारत की अखंडता और सुरक्षा के लिए सभी धर्मों के लोग एकजुट हैं।

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