भोपाल। राजधानी भोपाल के आगामी दो दशकों से अधिक के विकास की रूपरेखा से जुड़े मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस विकास योजना के प्रारूप पर सख्त ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया है कि इसमें केवल शहर के भौतिक विस्तार और निजी वाहनों की आवाजाही को प्राथमिकता दी गई है, जबकि सार्वजनिक परिवहन, किफायती आवास, पेयजल आपूर्ति और मूलभूत नागरिक सुविधाओं के लिए कोई ठोस योजना प्रस्तुत नहीं की गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने रविवार को मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 18 के अंतर्गत संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश के समक्ष लिखित आपत्तियां प्रस्तुत कीं। उन्होंने प्रशासनिक व कानूनी प्रक्रियाओं, भूमि उपयोग, जल निकायों के संरक्षण तथा वित्तीय प्रावधानों से जुड़े कई संवेदनशील बिंदुओं पर सवाल खड़े किए हैं।
दो दशकों से नई प्रभावी विकास योजना का लंबा इंतजार
कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया कि भोपाल शहर की पुरानी विकास योजना वर्ष 2005 में ही निष्प्रभावी हो चुकी थी, जिसके बाद से पिछले 21 वर्षों से राजधानी एक नई और प्रभावी विकास योजना की बाट जोह रही है। उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती 15 माह के शासनकाल में भोपाल विकास योजना-2031 का प्रारूप प्रकाशित किया गया था, जिस पर प्राप्त तीन हजार से अधिक आपत्तियों का निराकरण कर अंतिम अधिसूचना जारी होना शेष था, परंतु वर्तमान सरकार द्वारा उसे निरस्त कर दिया गया। उन्होंने वर्तमान प्रारूप में वर्ष 2024 के भूमि उपयोग मानचित्र के उपयोग, इसके विधिवत प्रकाशन, आपत्तियां आमंत्रित करने और अंगीकरण की संपूर्ण प्रक्रिया की वैधानिकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जल निकायों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण का अभाव
राजधानी की ऐतिहासिक झीलों और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई है। उन्होंने मांग की कि भोपाल के 18 प्रमुख जल निकायों के कैचमेंट क्षेत्रों के संरक्षण के लिए एक समग्र योजना तैयार की जानी चाहिए, जबकि वर्तमान प्रारूप में केवल बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र को ही शामिल किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2005 के मास्टर प्लान में तय किए गए ग्रीन बेल्ट और हरित क्षेत्रों में आए बदलावों का तुलनात्मक ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की गई है ताकि शहरी विस्तार के दौरान पर्यावरण और जल स्रोतों की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन किया जा सके।
बढ़ती आबादी के अनुरूप सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की अनदेखी
मास्टर प्लान में वर्ष 2047 तक भोपाल की कुल जनसंख्या लगभग 45 लाख पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। इस अनुमान पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि इतनी विशाल आबादी के आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन के सुदृढ़ीकरण की कोई स्पष्ट कार्ययोजना नहीं बनाई गई है। वर्तमान में शहर में लगभग 54 प्रतिशत आवाजाही पैदल, साइकिल या ऑटो से होती है, फिर भी बस नेटवर्क, साइकिल ट्रैक और पेडेस्ट्रियन जोन के लिए जगह चिह्नित नहीं की गई है। इसके साथ ही मेट्रो रूट के दोनों तरफ 500 मीटर के दायरे में स्थित 9,500 हेक्टेयर क्षेत्र में ट्रांजित ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) लागू करने पर आपत्ति जताते हुए कहा गया कि निर्माण घनत्व, फ्लोर एरिया रेशियो, पार्किंग और किफायती आवास जैसे अहम नियमों को अनिश्चित छोड़ दिया गया है।
बायपास मार्ग पर अनियोजित विकास और निजी वाहनों पर बढ़ती निर्भरता
शहर के 51 किलोमीटर लंबे और 75 मीटर चौड़े बायपास के दोनों ओर 300-300 मीटर के दायरे में 2,449 हेक्टेयर क्षेत्र में सघन मिश्रित विकास के प्रस्ताव को भी दोषपूर्ण बताया गया है। इस क्षेत्र में मेट्रो, मास ट्रांजिट या समर्पित बस लेन जैसी सुविधाएं प्रस्तावित न होने के कारण बायपास के किनारे होने वाला व्यापक निर्माण निजी वाहनों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि करेगा। इससे बाहरी भारी यातायात को शहर के अंदर आने से रोकने का बायपास का मूल उद्देश्य ही पूरी तरह से निष्प्रभावी हो जाएगा।
झुग्गीवासियों के लिए किफायती आवास की अनुपलब्धता
भोपाल में वर्तमान समय में करीब 4.8 लाख झुग्गीवासी निवास करते हैं, परंतु नए मास्टर प्लान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के लिए पर्याप्त भूमि आरक्षित करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके साथ ही आवासीय भूमि का प्रतिशत निर्धारित मानकों से 5 से 7 प्रतिशत अधिक रखा गया है, जबकि घनत्व 28 से 48 प्रतिशत तक कम दर्ज किया गया है। इसी विसंगति के कारण योजना क्षेत्र को 601 वर्ग किलोमीटर से सीधे बढ़ाकर 1,017 वर्ग किलोमीटर तक फैलाया गया है, जिससे अवसंरचनात्मक लागत में अत्यधिक वृद्धि होगी।
वर्ष 2047 की जनसंख्या के अनुसार जलापूर्ति और सीवेज व्यवस्था पर अनिश्चितता
विकास योजना में जलापूर्ति की जरूरतों का आकलन वर्ष 2031 तक ही सीमित रखे जाने पर आश्चर्य जताया गया है, जबकि योजना की समयसीमा वर्ष 2047 निर्धारित की गई है। अनुमानित 45 लाख आबादी के लिए 209 एमएलडी पानी की भारी किल्लत होने का आकलन है, परंतु इस कमी को दूर करने के जल स्रोत स्पष्ट नहीं हैं। दीर्घकालिक योजना में भविष्य की मांग के अनुसार पेयजल आपूर्ति, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) और विद्युत सब-स्टेशनों की स्थापना के लिए पहले से भूमि चिह्नित की जानी चाहिए।
59 हजार करोड़ के अनुमानित व्यय का वित्तीय खाका सार्वजनिक करने की मांग
योजना में सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए विकसित भूमि का मात्र 0.42 प्रतिशत हिस्सा ही आवंटित किया गया है। शहर के इतने बड़े पैमाने पर विस्तार के दौरान सड़क, जल, सीवेज और बिजली तंत्र विकसित करने के लिए लगभग 59 हजार करोड़ रुपये का भारी निवेश अपेक्षित है, परंतु इस बजट की व्यवस्था कहां से होगी, इसका कोई वित्तीय रोडमैप नहीं दिया गया है। अंत में यह मांग उठाई गई कि नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 15 के तहत अद्यतन नक्शा अपनाकर मास्टर प्लान का संशोधित प्रारूप पुनः प्रकाशित किया जाए, जिसमें कानूनी प्रक्रियाओं और जनहित का पूरा ध्यान रखा जाए।

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