गुरुग्राम। के बिलासपुर थाना इलाके स्थित सिधरावली में सिग्नेचर ग्लोबल की निर्माणाधीन सोसाइटी में सोमवार रात बेसमेंट की मिट्टी के साथ दीवार ढहने से सात मजदूरों की मौत हो गई। चार घायल मजदूरों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मलबे में कई मजदूरों के दबे होने की आशंका है। पुलिस ने राहत और बचाव कार्य के साथ मामले की जांच शुरू कर दी है। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गई और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया। गहराई ज्यादा होने की वजह से बचाव दल को काफी समस्या आ रही थी। देर रात तक बचाव कार्य जारी रहा। पुलिस के मुताबिक, हताहतों की संख्या बढ़ सकती है। मिट्टी से निकालकर मजदूरों को राजस्थान के भिवाड़ी स्थित नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां सात मजदूरों को मृत घोषित कर दिया, जबकि चार मजदूरों की हालत गंभीर बनी हुई है। डीसीपी मानेसर दीपक कुमार ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही बचाव कार्य शुरू करा दिया गया। हादसे की जांच की जा रही है।
समय पर मिलती सूचना तो बच जाती कई की जान
छानबीन के दौरान पता चला है कि घटना करीब 7:30 बजे की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हादसे के बाद प्रोजेक्ट मैनेजर की ओर से पहले अपने स्तर पर ही मजदूरों को निकल जाने का प्रयास किया गया। जब मामला बिगड़ता देखा तो पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। राहत के काम में जुड़े लोगों का मानना है कि अगर समय पर जानकारी मिल गई होती तो कई मजदूर की जान बच सकती थी।
60 फीट गहरे बेसमेंट से दबे मजदूर
सिग्नेचर ग्लोबल बिल्डर के सिटी ऑफ कलर्स के नाम से प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। जहां सोमवार की रात करीब 7:30 बजे निर्माणाधीन साइट के बेसमेंट की मिट्टी टूट कर मजदूरों पर गिर गई। साथ में दीवार भी ढह गई। करीब 60 फीट गहरे बेसमेंट से दबे मजदूरों को निकालने के लिए राहत-बचाव कार्य शुरू किया। भिवाड़ी के सरकारी अस्पताल पहुंचे मजदूरों में सतीश, भागीरथ, मिलन, मंगोल, शिव शंकर, परमेश्वर समेत सात को मृत घोषित कर दिया। चार मजदूर छोटेलाल, शिवकांत, दीन दयाल, इंद्रजीत की हालत गंभीर बताई गई है। घायल व मृतक मजदूर यूपी व नेपाल के बताए जा रहे हैं। बिलासपुर थाना के प्रभारी सुनील कुमार ने बताया कि फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है।
होली पर गए थे मजदूर घर वरना हो जाता और बड़ा हादसा
बिल्डर का प्रोजेक्ट पर काफी दिनों से चल रहा था। यूपी के रहने वाले श्रमिकों की एक टोली होली पर घर गई हुई है जो अभी तक वापस नहीं आई है।रामदीन का कहना है कि यहां पर रोजाना काम करने वाले मजदूरों की संख्या ज्यादा होती है। होली के चलते मजदूर भाई अभी घर गए हुए हैं। अगर मजदूरों की संख्या ज्यादा रहती तो और बड़ा हादसा होता।

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