दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में आशा सहयोगिनियां अहम कड़ी है। अब इनके हाथ में एआइ की ताकत दे दी गई है। उदयपुर की 869 आशा वर्कर्स आशा बॉट मॉडल से जुड़कर सेवाएं दे रही हैं। वाट्सऐप आधारित चैटबॉट को खुशी बेबी नामक संस्था ने माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च की मदद से विकसित किया है। आशा बॉट केंद्र सरकार, यूनिसेफ और अन्य संस्थानों के 40 से ज्यादा दस्तावेज पर जानकारी दे रहा है। आशाबॉट नामक चैटबॉट उदयपुर में काम कर रहा है।
10 लाख से अधिक जुड़ेंगी आशा वर्कर्स
इसके जरिये 24 हजार से अधिक मैसेज भेजे जा चुके हैं। 869 आशा वर्कर्स को जोड़ा जा चुका है। लक्ष्य है कि इसे देशभर की 10 लाख से अधिक आशा वर्कर्स तक पहुंचाया जाए। यह कार्यकर्ताओं को उन इलाकों में काम करने में मदद कर रहा है, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं रहता। जहां दूरदराज तक चिकित्सक की उपस्थिति नहीं होती, वहीं अन्य चिकित्साकर्मियों की पहुंच नहीं रह पाती है।
ऐसे काम करता है आशाबॉट
प्रशिक्षित नर्सों से जवाब कुछ घंटों में आशा वर्कर्स को भेज दिया जाता है। आशाबॉट भरोसेमंद जानकारी ही साझा करता है।
बॉट के जवाब लिखित और वॉइस में भी मिलते हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर आशा वर्कर मरीजों को सुना सकती है।
इनका कहना है…
आशा वर्कर हमेशा स्वास्थ्य सेवा की सबसे जरूरी कड़ी रही हैं, लेकिन उनके पास हमेशा जरूरी उपकरण नहीं रहे। अब एआइ आधारित सेवाएं उनका काम आसान बनाएगी, वहीं सटीक जानकारी जरूरतमंदों तक पहुंचाएगी।
रुचित नागर, संस्थापक, खुशी बेबी संस्था
हमने आशाओं से सीधे बात करके सिस्टम को उनकी जमीनी जरूरतों के अनुसार ढाला है। उन्होंने हमसे संवेदनशील विषय, जैसे- गर्भ निरोधक और घरेलू हिंसा पर भी खुलकर बात की, जिनका जवाब आशाबॉट में मिलेगा।

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