गुरुग्राम: कभी गुड़गांव के नाम से जाने जाना वाला हरियाणा का गुरुग्राम जिला आज ट्रैफिक जाम, जलभराव और अव्यवस्थित ढांचों जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। बीते हफ्ते हुई बारिश ने एक बार फिर यह सच्चाई उजागर कर दी कि अरबों-खरबों कि यह 'मिलियन-डॉलर सिटी' कुछ ही घंटों की बरसात में तालाब बन जाती है। बारिश से जलभराव के बाद लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। बता दें कि गुरुग्राम आज भारत के आधुनिक आर्थिक विकास की पहचान है। आईटी, स्टार्टअप्स, बीपीओ, एमएनसी और लाखों नौकरियों का गढ़ बन चुका यह शहर अचानक ही एक अव्यवस्थित शहरी ढांचे की समस्या का सबसे बड़ा उदाहरण भी बन गया है। इसके पीछे की वजह क्या है आइए जानते हैं…
दिल्ली की नाकाम नीतियों से हुआ गुरुग्राम का जन्म
एक्सपर्टस की मानें तो गुरुग्राम का अस्तित्व ही दिल्ली की विफल रियल एस्टेट नीतियों की देन है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने दशकों तक निजी रियल एस्टेट विकास पर रोक जैसी स्थिति बनाए रखी। नतीजतन, राजधानी में आधुनिक दफ़्तर और उच्च-स्तरीय आवास की भारी कमी रही। इसी शून्य को भरने के लिए गुरुग्राम और नोएडा उभरे। जहां नोएडा सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहा, वहीं गुरुग्राम ने डीएलएफ जैसे निजी डेवलपर्स के दम पर दुनिया को चौंका दिया। हाई-राइज़ अपार्टमेंट, सेंट्रल एयर-कंडीशनिंग, गोल्फ कोर्स और ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस दिल्लीवासियों के लिए नई क्रांति थे। यही वजह रही कि 2000 के दशक में बड़ी-बड़ी कंपनियां गुरुग्राम की ओर खिंच आईं।
क्यों लोगों की पहली पसंद बन गया
शुरुआत में लोग दिल्ली से गुरुग्राम नौकरी करने आते थे, लेकिन जल्द ही हालात उलट गए। गुरुग्राम ने न केवल नौकरियों का केंद्र बनाया बल्कि रिहाइश का भी पसंदीदा विकल्प बन गया। हालांकि, बुनियादी ढांचे का विकास इस तेज़ी के साथ कभी मेल नहीं खा पाया। हाईवे बना, पर जल्द ही जाम से भर गया। मॉल और कॉर्पोरेट टावर्स खड़े हुए, मगर बारिश में सड़कें डूबती रहीं। बीते सप्ताह सोशल मीडिया पर तैरते वीडियो में दिखा कि बारिश के बाद कई-कई किलोमीटर तक गाड़ियां फंसी रहीं। कई लोगों ने छह घंटे तक जाम में फंसे रहने की शिकायत की। करोड़ों के फ्लैटों वाले सेक्टरों में भी जलभराव और अव्यवस्था का आलम रहा।
विशेषज्ञ भी मानते हैं ये बात
विशेषज्ञ मानते हैं कि समस्या गुरुग्राम की खराबी नहीं है, बल्कि यह कि यह भारत के मानकों से बहुत अच्छा है। पूरे देश में ग्रेड-ए शहरों की कमी है, इसलिए लाखों लोग गुरुग्राम की ओर आकर्षित होते हैं। यहां 2 लाख रुपये मासिक से अधिक की नौकरियां भारी मात्रा में मिलती हैं, जो बाकी भारत के अधिकांश शहरों में सपना हैं। यही वजह है कि गुरुग्राम केवल हरियाणा का ही नहीं बल्कि पूरे भारत का रणनीतिक शहर है। सवाल यह है कि क्या हरियाणा सरकार इसे बचाने में सक्षम है, जब उसका अधिकांश राजनीतिक और आर्थिक ध्यान ग्रामीण और कृषि प्रधान इलाकों पर केंद्रित रहता है?
समाधान क्या है?
दिल्ली में विलय: यदि गुरुग्राम को दिल्ली में शामिल कर लिया जाए, तो इसके शहरी विकास की जरूरतें बेहतर तरीके से पूरी हो सकती हैं।
केंद्रशासित प्रदेश (UT): गुरुग्राम को स्वतंत्र दर्जा देकर इसका अपना शासन और बजट बनाया जा सकता है।
स्ट्रैटेजिक सिटीज एक्ट: भारत सरकार को उन शहरों को विशेष दर्जा देना चाहिए जो राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से अहम हैं। गुरुग्राम और बेंगलुरु जैसे शहर इसमें शामिल हो सकते हैं।

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