February 11, 2026

वैशाली नदी पुनर्जीवन प्रोजेक्ट का अटका काम, हाईकोर्ट ने नगर निगम को दिया 10 दिन का अल्टीमेटम

ग्वालियर: मुरार की वैशाली नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयास में रोढ़ा बने अतिक्रमण को हटाने में नाकाम नगर निगम को ग्वालियर हाईकोर्ट ने रिपोर्ट पेश करने के लिए 10 दिन का समय दिया है. ये सुनवाई मुरार की वैशाली नदी के पुनर्जीवन के लिए काम कर रहे पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल की ओर से लगाई गई याचिका पर की गई.

 

वैशाली नदी के पुनर्जीवन में अतिक्रमण बना रोड़ा

कई साल पहले ग्वालियर शहर से होकर बहने वाली वैशाली नदी विलुप्त हो गई थी. ये नदी धीरे-धीरे नाले में तब्दील हो गई लेकिन एक साल पहले इसे पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल ने प्रयास किया और श्रमदान कर इसकी सफाई और घाट चौड़ीकरण का काम शुरू हुआ. वैशाली नदी अपने पुराने स्वरूप में लौटने लगी.

केंद्र सरकार से भी इसे संबल मिला और मुरार की वैशाली नदी को नमामी गंगे प्रोजेक्ट में शामिल किया गया. अब नगर निगम द्वारा वैशाली नदी पर विस्तार, विकास और सौंदर्यीकरण का काम किया जाना है लेकिन निगम की उदासीनता के चलते ये प्रोजेक्ट रुका हुआ है. क्योंकि नदी के आसपास काफी अतिक्रमण हो चुका है जिसे नगर निगम को हटाना है.

 

हाईकोर्ट ने 10 में रिपोर्ट पेश करने का दिया समय

इस उदासीनता की वजह से डिले हो रहे प्रोजेक्ट के लिए पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल और जिस निजी कंपनी द्वारा इस प्रोजेक्ट पर काम किया जाना है, उन दोनों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी. जिस पर नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने के संबंध में रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट में पेश करने के लिए समय मांगा गया है.

हाईकोर्ट के वकील विश्वजीत रातोनिया ने बताया कि "कोर्ट में सुनवाई के दौरान नगर निगम के अधिवक्तागण ने अतिक्रमण हटाने संबंधी विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा था. जिस पर एकल पीठ ने उन्हें 10 दिन का समय दिया है."

 

 

निष्पक्ष निगरानी के लिए कमेटी का सुझाव

नगर निगम की ओर से कोर्ट में यह बात रखी गई है कि, नदी पर चिन्हित अतिक्रमण को अगले 10 दिन के भीतर या 23 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई से पूर्व ही हटाने की कार्रवाई कर ली जाएगी. जिस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि, यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है जिसकी निष्पक्ष निगरानी के लिए शहर के प्रतिष्ठित नागरिक और तकनीकी विशेषज्ञों के नाम सुझाए जाएं और उन्हें एक कमेटी में शामिल किया जाए. जिससे यह प्रोजेक्ट बिना रुके आगे बढ़ सके.