नई दिल्लीः दोषी… अक्सर शिकायतकर्ता और उसकी भतीजी को देख सड़क पर नंगा हो जाता था। दिल्ली पुलिस में कार्यरत दोषी के इस कृत्य को न तो माफ किया जा सकता है और न ही अनदेखा..! पुलिसवाला होने के नाते वह कानून का पालन करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाध्य था, लेकिन उसने न सिर्फ शिकायतकर्ता के साथ बल्कि 6 साल की बच्ची के साथ भी यौन अपराध किया।
दोषियों को सुनाई सजा
हाई कोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी पूर्व सिपाही जयदेव (58), उसके हेड कॉन्स्टेबल बेटे सूरज भान उर्फ मोनू (39) और कॉन्स्टेबल भाई जगमाल (55) को सजा सुनाते हुए की। हाई कोर्ट ने गुरुवार को जयदेव को दो साल, जबकि सूरजभान और जगमाल को एक-एक साल की सजा सुनाई। तीनों को ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने के निर्देश दिए।
क्या है मामला
मामला मई 2013 का है। मानसरोवर पार्क एरिया में दो परिवारों के बीच प्रॉपर्टी विवाद था। पीड़ित फैमिली के मुखिया रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर थे, जबकि उनका बेटा एसआई और दामाद भी एएसआई है। दूसरी तरफ सिपाही जयदेव, उसका बेटा हेड कॉन्स्टेबल सूरजभान, जगमाल और जगदेव सिपाही थे। आरोप था कि जयदेव पीड़ित परिवार के घर के सामने नंगा खड़ा हो जाता था। कभी पेशाब करता तो कभी मास्टरबेशन। कई बार पुलिस कॉल किए, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
कैमरे में कैद हो गई पूरी घटना
रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर की बेटी ने 31 मई 2013 को पुलिस को बताया कि वह सुबह अपने घर के गेट पर पहुंची तो जयदेव नंगा खड़ा था। वह उन्हें और बालकनी पर खड़ी छह साल की भतीजी की तरफ गंदे इशारे कर रहा था। आरोप है कि इसका विरोध करने पर सूरजभान और जगमाल घर से निकले और गाली-गलौज और अश्लील हरकतें करने लगे। यह पूरा वाकिया सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। मामला आला अफसरों तक पहुंचा तो मुकदमा दर्ज हुआ। जयदेव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। सेशन कोर्ट ने 2020 में आरोपियों को बरी कर दिया।
मामले में कोर्ट नरमी बरतने से इनकार
स्टेट और शिकायतकर्ता ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की, जिसने 28 मई 2025 को तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया। सजा में नरमी बरतने के लिए जयदेव की तरफ से मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने और इहबास में इलाज कराए जाने की बात कही। हाई कोर्ट ने कहा कि मामला मई का था, जबकि वह जून 2013 में भर्ती हुआ था। बाकी दोनों ने भी नरमी के लिए अपनी-अपनी समस्याएं रखीं। लेकिन कोर्ट ने मामले को गंभीर माना और नरमी से इनकार कर दिया।
पॉक्सो एक्ट के तहत सुनाई सजा
कोर्ट ने जयदेव को पॉक्सो एक्ट सेक्शन-12 (बच्ची से यौन उत्पीड़न) के तहत दो साल कैद और 10 हजार जुर्माना लगाया। आईपीसी की धारा 294 (सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत) में तीन महीने कैद और एक हजार जुर्माना लगाया। 354ए (यौन उत्पीड़न) के तहत दो साल कैद और पांच हजार जुर्माना लगाया।
शिकायतकर्ता के पति का प्रमोशन रुका
हाई कोर्ट ने कहा कि इस केस के बाद दोषियों पर 2014 और 2015 मुकदमे दर्ज हुए थे, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। दोषियों ने दबाव बनाने के लिए शिकायतकर्ता के पति (ASI) के खिलाफ भी केस दर्ज करवाए। इससे 2016 में होने वाला उनका प्रमोशन अब तक नहीं हुआ। जानकारी के मुताबिक, दोषियों ने पीड़ित परिवार पर 6 केस दर्ज करवाए, जिनमें एक बागपत में करवाया था। इसका असर बच्ची के एसआई पिता पर भी पड़ा। इस वजह से सूरजभान और जगमाल पर नरमी बरतने से इनकार कर दिया।

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चार साल की बच्ची मामले में दोषी को 50 साल की सजा।