मुंबई। शिवसेना (उद्धव) सांसद संजय राउत ने कहा कि भाजपा को 120-125 सीटें मिलीं, शिंदे ग्रुप को 54 मिलीं और अजित पवार को 40-42 सीटें मिलीं। ये नंबर असेंबली वाले ही हैं, है ना? वहीं मशीन, वहीं सेटिंग और वहीं पैसा। यही हमारा लोकतंत्र है। नंबरों में बिल्कुल भी बदलाव नहीं हुआ है। भाजपा ने मशीनें उसी तरह सेट की हैं। इस कारण वहीं नंबर दिख रहे हैं। उन्हें कम से कम नंबर तब बदलने चाहिए थे।
उन्होंने कहा कि चुनाव में पैसों की बारिश हुई। उस बारिश से कौन बचेगा? हमारे उगाए और बोए हुए खेत भी उसके आगे झुक गए हैं। भाजपा और शिंदे ग्रुप 30 करोड़ के बजट वाली म्युनिसिपैलिटी पर 150 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं। राउत ने कहा कि अभी तक हमने म्युनिसिपल इलेक्शन में कैंपेनिंग के लिए हेलिकॉप्टर और प्राइवेट प्लेन का इस्तेमाल नहीं किया है। हमने ये इलेक्शन वर्कर्स पर छोड़ दिए थे। लेकिन यहां मुकाबला रूलिंग पार्टियों के अंदर था। मुकाबला हमारे साथ नहीं था। पावर में बैठी 3 पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ खेलती रहीं। इससे बहुत सारा पैसा बना। इससे सचमुच पैसों की बारिश हुई। लोगों को भी पैसे से वोट देने की आदत हो गई है।
वहीं भाजपा ने नागपुर में सबसे अधिक स्थानीय निकाय सीटें जीतीं, जिसमें 22 नगर परिषद और नगर पंचायतें शामिल हैं। इसके बाद पुणे में राष्ट्रीय समिति ने 10 सीटें जीतीं। इन दोनों के अलावा, किसी भी अन्य पार्टी ने किसी जिले में सात से अधिक सीटें नहीं जीतीं। शिवसेना ने जलगांव जिले में सबसे अधिक (छह सीटें) जीतीं। चंद्रपुर जिले में कांग्रेस ने सबसे अधिक सीटें जीतीं, सात सीटों पर कब्जा जमाया। एमवीए पार्टियों में, कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने एक जिले में पांच से अधिक सीटें जीतीं। एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) एक जिले में दो से अधिक सीटें नहीं जीत पाईं, जिनमें से शिवसेना ने यवतमाल में दो सीटें जीतीं।

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