राज्यपाल ने विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण के लिए कार्य करने पर जोर दिया

जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि भारतीय संस्कृति व्यष्टि से समष्टि की दृष्टि लिए है। तेजी से हो रहे विकास के अंतर्गत अपनाई जा रही प्रौद्योगिकी सुरक्षित, नैतिक और सभी के हित में हो, तभी उसकी सार्थकता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें जीवन के संतुलन और समन्वय पर ही आरंभ से जोर दिया गया है। उन्होंने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत पाठ्यक्रमों को भारतीय मूल्यों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण के लिए कार्य करने पर जोर दिया है।
बागडे शाहपुरा में बाबा गंगादास राजकीय बालिका महाविद्यालय में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सामाजिक—सांस्कृतिक परिवर्तन, तकनीकी प्रगति एवं पर्यावरणीय सुधार विषयक संगोष्ठी में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के दौर में तकनीकी के जीवन में बढ़ते दखल की चर्चा करते हुए कहा यांत्रिकी जीवन में सहयोग के लिए है परन्तु इसका उपयोग मानसिक तनाव को जन्म देता है तो ठहरकर सोचना होगा। उन्होंने भारतीय संस्कृति की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें सदा ही समन्वय पर जोर दिया गया है। प्रौद्योगिकी के उपयोग के साथ पर्यावरण संरक्षण के साथ मानसिक स्वास्थ्य के प्रति भी हमें सचेत रहना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन के अंतर्गत पर्यावरणीय जीवन पद्धति अपनाने के साथ धैर्य और सहजता के गुणों का विकास किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आस्था और विश्वास से जुड़े संस्कारों की नींव पर ही सनातन मूल्य समाज के पथ प्रदर्शक बने हैं। इस पर सभी स्तरों पर विचार होना चाहिए।राज्यपाल ने जीवन से जुड़ी मर्यादाओं, नियमों और अनुशासन का पालन करने के साथ समाज में हो रहे तीव्र गति से बदलावों के आलोक में भारतीय संस्कृति और उदात्त जीवन मूल्य अपनाए जाने का आह्वान किया।
 

You may have missed