फिल्म और टीवी जगत की दिग्गज हस्ती धीरज कुमार का 15 जुलाई को 79 की उम्र में निधन हो गया। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक उन्हें निमोनिया की वजह से मुंबई के कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, जिसकी वजह से वेंटिलेटर पर रखा गया था।
धीरज कुमार एक दिग्गज एक्टर, निर्देशक और प्रोड्यूसर थे। आपको जानकर हैरानी होगी कि इनकी शुरुआत राजेश खन्ना के साथ हुई थी। ये दोनों एक टैलेंट शो में अपॉनेंट थे। इनके साथ सुभाष घई भी मुकाबला कर रहे थे। फिल्मों में हाथ आजमाने के बाद इन्होंने टीवी शो भी किए और फिर एक मशहूर टीवी सीरियल भी दिया, जिसका नाम ओम नम: शिवाय था। उन्हें निमोनिया की बीमारी हो गई थी, जो दिखने में आम लग सकती है लेकिन कभी कभी खतरनाक हो जाती है। यह बच्चों और बुजुर्गों के लिए बहुत घातक होती है। आइए इस बीमारी के बारे में जानते हैं।
1965 में लिया था कॉन्टेस्ट में हिस्सा
फेफड़ों की बीमारी है निमोनिया
निमोनिया एक लंग इंफेक्शन है। मेडलाइन प्लस के मुताबिक यह एक या दोनों फेफड़ों में हो सकता है। फेफड़ों के अंदर एयर सैक होते हैं, जिसमें हवा भरती है। इस बीमारी में इन छोटे-छोटे पॉकेट के अंदर पानी या पस भर जाती है। इसके कारण, उम्र के मुताबिक यह हर मरीज पर अलग प्रभाव छोड़ता है।
क्यों होती है ये बीमारी?
निमोनिया का सबसे प्रमुख कारण बैक्टीरिया है। यह खुद विकसित हो सकता है और कुछ वायरल इंफेक्शन की वजह से भी हो सकता है। वायरस की वजह से होने वाला निमोनिया अक्सर हलका होता है और खुद चला जाता है। लेकिन जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, उन्हें फंगल निमोनिया का खतरा अधिक होता है।
निमोनिया के लक्षण
- ठंड लगना
- बुखार
- बलगम वाली खांसी
- सांस फूलना
- सांस लेने या खांसी पर सीने में दर्द
- डायरिया
- जी मिचलाना या उल्टी
बच्चों-बुजुर्गों में अधिक खतरा
कुछ लोगों और स्थितियों में इस लंग डिजीज का खतरा अधिक होता है। जैसे 2 साल या उससे कम उम्र के बच्चे या फिर 65 साल या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग। स्मोकिंग, पोषण की कमी, फेफड़ों की दूसरी बीमारी, कुछ केमिकल-प्रदूषकों के संपर्क में रहने वाले लोगों में भी इसका हाई रिस्क होता है।
बुजुर्गों के लिए क्यों है ज्यादा खतरनाक?
यह बीमारी कई सारी वजहों से बुजुर्गों के लिए खतरनाक हो सकती है। जिसमें पहली उम्र है, जो इम्यून सिस्टम को कमजोर बना देती है। साथ में दूसरी बीमारियां भी हो सकती हैं, जो इसका खतरा और जटिलता बढ़ा देती हैं। जैसे सीओपीडी और हार्ट डिजीज से निमोनिया का खतरा ज्यादा होता है।

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