उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार वर्ष में बदलाव का मौद्रिक नीति पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बदलाव करने के बजाय उन्हें फिलहाल स्थिर रख सकता है।
जनवरी में महंगाई दर कितनी रही?
रिपोर्ट के अनुसार, नए आधार वर्ष 2023-24 के हिसाब से जनवरी 2026 में महंगाई दर (हेडलाइन CPI) 2.75 प्रतिशत रही, जो अनुमान के मुताबिक है। वहीं, कोर महंगाई (जिसमें खाद्य और ईंधन जैसे उतार-चढ़ाव वाले आइटम कम शामिल होते हैं) घटकर 3.46 प्रतिशत पर आ गई, जो पुराने अनुमान से बेहतर स्थिति दिखाती है।
एमपीसी किस आधार पर करती है फैसला?
रिपोर्ट में कहा गया है कि आधार वर्ष बदलने से आंकड़ों की गणना का तरीका अधिक सटीक और व्यापक हुआ है, लेकिन इससे आरबीआई की नीतिगत सोच में तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) सिर्फ सालाना महंगाई के आंकड़े नहीं, बल्कि महंगाई की असली रफ्तार और आगे का ट्रेंड ज्यादा ध्यान से देखेगी।
कोर सीपीआई में गिरावट किस वजह से आई?
नए आधार वर्ष के तहत आंकड़ों के मुताबिक, कोर सीपीआई में गिरावट मुख्य रूप से गोल्ड सीपीआई का भार 1.1 प्रतिशत से घटकर 0.62 प्रतिशत होने के कारण आई। वहीं, सोने को छोड़कर कोर महंगाई 2.91 प्रतिशत तक बढ़ी, जिससे संकेत मिलता है कि अंतर्निहित महंगाई रुझान अभी भी कमजोर बने हुए हैं।
खाद्य महंगाई में हुई बढ़त
इस बीच, खाद्य महंगाई भी थोड़ी बढ़कर 2.11 प्रतिशत पर पहुंच गई है। नए आधार वर्ष में खाने-पीने की चीजों का वजन पहले के लगभग 46 प्रतिशत से घटाकर करीब 40 प्रतिशत कर दिया गया है और ज्यादा बाजारों, शहरों और वस्तुओं को शामिल किया गया है, जिससे डेटा अधिक व्यापक हो गया है।रिपोर्ट का कुल निष्कर्ष यह है कि आधार वर्ष बदलने के बावजूद आरबीआई जल्दबाजी में ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। आने वाली तिमाहियों में उसका फोकस महंगाई के रुझान और बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) को संभालने पर रहेगा, इसलिए दरें फिलहाल यथावत रहने की संभावना है।

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