नीमच : मध्य प्रदेश के मालवा अंचल में अफीम उत्पादक किसानों के लिए साल का सबसे अहम चरण आ गया है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की देखरेख में नीमच, मंदसौर और जावरा क्षेत्र में अफीम तौल की मुख्य प्रक्रिया 1 अप्रैल से विधिवत रूप से शुरू होने जा रही है। 17 अप्रैल तक चलने वाली इस वृहद प्रक्रिया में इस वर्ष अंचल के 40 हजार से अधिक किसान अपनी अफीम की उपज लेकर 9 निर्धारित तौल केंद्रों पर पहुंचेंगे।
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीबीएन ने इस पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध किया है। विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, पूरी तौल व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की गई है। वरिष्ठ अधिकारियों ने काश्तकारों से अपील की है कि वे उन्हें आवंटित निर्धारित तिथि और संबंधित केंद्र पर ही अपनी उपज लेकर पहुंचें, ताकि तौल केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ से बचा जा सके और कार्य तय समय-सीमा में सुगमता से पूर्ण हो।
जिलेवार तौल केंद्रों की स्थिति और किसानों का विवरण
नीमच जिला: 3 केंद्रों पर होगी 14 हजार से अधिक किसानों की तौल
- नीमच-1: यहाँ 1 से 17 अप्रैल तक सबसे लंबी प्रक्रिया चलेगी, जिसमें 225 गांवों के 5,087 किसानों की अफीम तौली जाएगी।
- नीमच-2: इस केंद्र पर 1 से 10 अप्रैल तक 140 गांवों के 4,122 किसान अपनी उपज लेकर पहुंचेंगे।
- नीमच-3: यहाँ 1 से 11 अप्रैल तक 163 गांवों के 5,404 किसानों की उपज का तौल कार्य संपन्न होगा।
मंदसौर जिला: तीन केंद्रों और गरोठ में व्यापक इंतजाम
- मंदसौर-1: यहाँ 28 मार्च से ही तौल की प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी है।
- मंदसौर-2: इस केंद्र पर 1 से 14 अप्रैल के बीच किसानों की उपज तौली जाएगी।
- मंदसौर-3 (सीतामऊ): यहाँ 31 मार्च से 11 अप्रैल तक तौल कार्य चलेगा।
गरोठ (भानपुरा क्षेत्र): यहाँ के किसानों के लिए 28 से 31 मार्च के बीच तौल की व्यवस्था की गई है।
जावरा क्षेत्र: दो केंद्रों पर 3700 से अधिक किसान
- जावरा-1: इस केंद्र पर 2 से 7 अप्रैल के बीच 132 गांवों के 2,573 किसानों की अफीम तौली जाएगी।
- जावरा-2: यहाँ 28 से 31 मार्च के बीच 168 गांवों के 1,162 किसानों की उपज ली जा रही है।
चाक-चौबंद रहेगी सुरक्षा व्यवस्था
अफीम (जिसे अंचल में ‘काला सोना’ भी कहा जाता है) की कीमत और संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और सीबीएन ने सभी 9 केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। तौल केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के साथ-साथ सशस्त्र बलों की तैनाती की गई है। साल भर की कड़ी मेहनत के बाद अपनी उपज विभाग को सौंपने को लेकर किसानों में खासा उत्साह देखा जा रहा है और वे अपनी तैयारियों में पूरी तरह से जुट गए हैं।

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