चंडीगढ़ | हरियाणा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े बड़े घोटाले की जांच तेजी से चल रही है। गुरुवार को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की डीजीपी चारू बाली और एसपी गंगाराम पुनिया ने प्रेस वार्ता में महत्वपूर्ण अपडेट दिए। जांच में पता चला है कि फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी विभागों के खातों से पैसों का हेरफेर किया गया था।
12 बैंक खातों से ट्रांसफर हुए थे पैसे
कुल 12 ऐसे बैंक अकाउंट्स का खुलासा हुआ है, जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे और इनसे जुड़े लोगों की भी पहचान हो चुकी है। अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें से 10 ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। इनमें 6 बैंक कर्मचारी, 4 प्राइवेट व्यक्ति और एक पब्लिक सर्वेंट शामिल हैं।
100 बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग
एसीबी ने आगे की जांच के लिए 100 बैंक अकाउंट्स को फ्रीज करने की मांग की है। सभी संबंधित विभागों से रिकॉर्ड खोले जा चुके हैं और बैंक की टीम तथा विभागीय अधिकारी लगातार सहयोग कर रहे हैं। एसीबी हर अनाधिकृत ट्रांजेक्शन को ट्रेस कर रही है और यह जांच कर रही है कि घोटाले में किस-किस स्तर तक इन्वॉल्वमेंट है। जिन सरकारी पैसों की प्राप्ति पहले नहीं हो रही थी, वे अब मिल चुके हैं। एकाउंटिंग और बैंकिंग विशेषज्ञों की मदद से सभी अनाधिकृत लेन-देन की विस्तृत डिटेल्स निकाली जा रही हैं। यह घोटाला मुख्य रूप से हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के फंड्स से जुड़ा है और जांच आगे बढ़ने पर और खुलासे होने की संभावना है।

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