नई दिल्ली। जापान ने फरवरी महीने में 57.3 अरब येन (करीब 36 करोड़ डॉलर) का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) दर्ज किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले महीने के घाटे के बाद एक महत्वपूर्ण सुधार है। वित्त मंत्रालय के मौसमी समायोजित प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में जापान का निर्यात उम्मीद से बेहतर 4.2 प्रतिशत बढ़कर 9.57 ट्रिलियन येन पर पहुंच गया। वहीं, आयात में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह सालाना आधार पर 10.2 प्रतिशत बढ़कर 9.51 ट्रिलियन येन रहा। जनवरी में आयात 2.5 प्रतिशत घटा था और उस महीने जापान को 1.15 ट्रिलियन येन का व्यापार घाटा झेलना पड़ा था। हालांकि, आने वाले महीनों में जापान पर आयात लागत का दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। जापान अपनी तेल जरूरतों के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है। इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत हाल के हफ्तों में बढ़कर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जिससे ऊर्जा आयात बिल और बढ़ सकता है।
एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स बूम से भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2035 तक 300 अरब डॉलर के पार
भारत का सेमीकंडक्टर बाजार आने वाले वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने जा रहा है। डेलॉइट की रिपोर्ट के अनुसार, यह बाजार 2030 तक करीब तीन गुना बढ़कर 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का सेमीकंडक्टर बाजार लगभग 45-50 अरब डॉलर का है और पिछले तीन वर्षों में यह करीब 20 प्रतिशत की सालाना दर (CAGR) से बढ़ा है। इस तेज वृद्धि के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमोबाइल सेक्टर, डेटा सेंटर विस्तार और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती मांग प्रमुख कारण हैं। वर्तमान में भारत अपनी 90 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। हालांकि, रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2035 तक देश में स्थानीय उत्पादन इतना बढ़ जाएगा कि यह घरेलू मांग का 60 प्रतिशत से अधिक पूरा कर सकेगा।

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