रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते का भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी सामरिक जरूरतों के आधार पर बहु-स्रोत रक्षा खरीद की नीति जारी रखेगा और साथ ही स्वदेशी रक्षा उत्पादन को और गति देगा। एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में सिंह ने कहा, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता हमारे रूस के साथ रक्षा संबंधों में बाधा नहीं है।उन्होंने कहा कि भारत अपनी परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार रूस से खरीद जारी रखेगा और जरूरत पड़ने पर फ्रांस, अमेरिका सहित अन्य देशों से भी रक्षा उपकरण लेगा। उनके अनुसार, भारत की नीति संतुलित और व्यावहारिक है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रही सरकार- सिंह
सिंह ने जोर देकर कहा कि सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूत करना चाहती है। हम स्वदेशीकरण पर दोगुना जोर देंगे। उन्होंने कहा, हाल के वर्षों में भारत ने घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए कई पहल की हैं। उल्लेखनीय है कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत दोनों देशों ने शुल्क बाधाओं को कम करने पर सहमति जताई है।
अमेरिका से भारत अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा
इसके अलावा, भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक की ऊर्जा, विमान, प्रौद्योगिकी और कोकिंग कोयले की खरीद की मंशा जताई है। अमेरिका ने मसाले, चाय, कॉफी, आम, अंगूर और काजू जैसे भारतीय कृषि उत्पादों को शुल्क मुक्त पहुंच देने पर भी सहमति दी है। इससे भारतीय कृषि निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। रक्षा सचिव के बयान से संकेत मिलता है कि भारत रणनीतिक रूप से संतुलित विदेश और रक्षा नीति को बनाए रखते हुए अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों को साथ लेकर आगे बढ़ेगा।

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