नई दिल्ली.
नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की हाल ही में संपन्न हुई बैठक के बाद से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। उनकी पार्टी के अधिकांश नेता भी इस मामले पर कुछ भी खुलकर बोलने से परहेज कर रहे हैं। इस बीच सियासी गलियारों में चर्चा है कि इंडिया गठबंधन के घटक दल जेडीयू नेता के लिए बड़ी जिम्मेदारी को लेकर लगभग मन बना चुके थे, लेकिन हिंदी और हिन्दुस्तान को लेकर वे सभी पीछ हट गए।
इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार उस समय भड़क गए थे, जब डीएमके नेता टीआर बालू ने आरजेडी सांसद मनोज झा से नीतीश कुमार के भाषण का अंग्रेजी में अनुवाद करने के लिए कहा।
सूत्रों का कहना है कि इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के बीच नीतीश कुमार की जिम्मेदारी को लेकर एक सहमति बन चुकी थी। ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री पद के लिए मल्लिकार्जुन खरगे का नाम आगे बढ़ाया। इसके बाद नीतीश कुमार के लिए संयोजक पद का ऐलान होना था, लेकिन उससे पहले बैठक में अपने भाषण के दौरान वह हिंदी के मुद्दे पर डीएमके नेता टीआर बालू पर भड़क गए। नीतीश कुमार ने यहां तक कह दिया कि हिन्दुस्तान में जो भी है उसे हिंदी आनी चाहिए। उनके इस बयान से बैठक में शामिल नेता हैरान हो गए। इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल कुछ नेताओं का मानना था कि नीतीश कुमार को संयोजक पद की जिम्मेदारी देनी चहिए। लेकिन हिन्दुस्तान और हिंदी को लेकर नीतीश कुमार के द्वारा दिए गए बयान के बाद सभी ने चुप्पी साध ली। सूत्रों का यह भी कहना है कि नीतीश कुमार कांग्रेस पार्टी के द्वारा उनके और टीआर बालू के बीच हुई बातचीत को लीक करने को लेकर काफी नाराज हैं।
ललन सिंह के इस्तीफे की अटकलें
मंगलवार को बिहार की राजनीति उस समय गरमा गई जब जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह के इस्तीफे को लेकर कयासबाजी होने लगी। हालांकि, जेडीयू ने इसका खंडन किया है। इस बीच नई दिल्ली में 28 दिसंबर को जेडीयू की राष्ट्रीय परिषद की महत्वपूर्ण बैठक भी बुलाई गई है। इस बैठक की घोषणा इंडिया गठबंधन की बैठक के तुंरत बाद की गई थी। ऐसा माना जा रहा है कि इसमें ललन सिंह इस्तीफा दे सकते हैं और पार्टी की कमान फिर एकबार नीतीश कुमार के हाथों जा सकती है।

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