स्वास्थ्य : फेफड़ों का कैंसर, एक ऐसी जानलेवा बीमारी है जो दुनिया भर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक बन चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में फेफड़ों के कैंसर से 18 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इस बीमारी की सबसे चिंताजनक बात यह है कि अक्सर इसका पता देर से चलता है, जिससे इलाज बेहद मुश्किल हो जाता है। दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते जोखिमों के बारे में लोगों को जागरूक करने और इससे बचाव के उपायों के बारे में शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल एक अगस्त को वर्ल्ड लंग्स कैंसर डे मनाया जाता है।
आज के समय में फेफड़ों में कैंसर होने की बीमारी केवल बुजुर्गों या धूम्रपान करने वालों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके मामले अब कम आयु के लोगों में देखेने को मिल रहे हैं। इसके कई मामले हमारी कुछ रोजमर्रा की गलत आदतों और जीवनशैली से सीधे तौर पर जुड़े होते हैं, जिन्हें कुछ सावधानी बरतकर रोका जा सकता है। आइए इस लेख में इस गंभीर विषय के बारे में विस्तार से जानते हैं साथ ही उन प्रमुख गलत आदतों व जोखिम कारकों के बारे में भी जानते हैं जो फेफड़ों के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा और सीधा कारण धूम्रपान है। चाहे वह सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, या ई-सिगरेट हो, तंबाकू के धुए में कई ऐसे रसायन होते हैं, जिसकी वजह से फेफड़ों में कैंसर का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। ये रसायन सीधे फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और उन्हें असामान्य रूप से बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे कैंसर विकसित होता है।
निष्क्रिय धूम्रपान (पैसिव स्मोकिंग)
कुछ लोग खुद तो धूम्रपान नहीं करते हैं लेकिन धूम्रपान कर रहे लोगों के साथ घूमने की आदत होती है। इसी को निष्क्रिय धूम्रपान कहते हैं। निष्क्रिय धूम्रपान तब होता है जब कोई व्यक्ति खुद सिगरेट, बीड़ी या हुक्का नहीं पीता, लेकिन धूम्रपान करने वाले के धुएं (सेकेंड-हैंड स्मोक) के संपर्क में आता है। यह धुआं उतना ही हानिकारक होता है जितना सीधे पीने वाले के लिए।
वायु प्रदूषण
आज के समय में वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर का एक और बड़ा और बढ़ता हुआ कारण बन रहा है। यह एक ऐसा खतरा है जिससे बच पाना अक्सर मुश्किल होता है। बाहरी वायु प्रदूषण, जो वाहनों के धुएं, औद्योगिक उत्सर्जन और धूल-मिट्टी से होता है, हमारे फेफड़ों को लगातार नुकसान पहुंचाता है।
इसी तरह, घर के अंदर का वायु प्रदूषण भी कम खतरनाक नहीं है। लकड़ी, कोयले या गोबर के उपलों पर खाना बनाना, मच्छर भगाने वाली कॉइल, अगरबत्ती और धूपबत्ती का ज्यादा इस्तेमाल घर के अंदर की हवा को दूषित करता है, जिससे फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है। लंबे समय तक ऐसे प्रदूषित वातावरण में रहने से फेफड़ों की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
हानिकारक रसायनों का संपर्क और खराब आहार
कुछ खास रसायनों के संपर्क में आना भी फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। एस्बेस्टस (जो पुराने निर्माण कार्यों में पाया जाता था), रेडॉन गैस, आर्सेनिक, क्रोमियम और निकल जैसे रसायन फेफड़ों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। जो लोग इन रसायनों से संबंधित उद्योगों में काम करते हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, खराब आहार और शारीरिक निष्क्रियता भी अप्रत्यक्ष रूप से फेफड़ों के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है।
सावधानियां
अपने फेफड़ों को सुरक्षित रखने और फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए कुछ अहम सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, धूम्रपान तुरंत छोड़ दें, और उन जगहों व लोगों से भी दूर रहें जहां धूम्रपान किया जा रहा हो ताकि निष्क्रिय धूम्रपान से बचा जा सके। प्रदूषण से बचाव के लिए, वायु प्रदूषण अधिक होने पर मास्क पहनें, घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और वेंटिलेशन का ध्यान रखें।
अपनी जीवनशैली को स्वस्थ बनाएं एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाएं, नियमित व्यायाम करें, और वजन को नियंत्रित रखें। सबसे जरूरी है कि आप अपने शरीर के लक्षणों पर ध्यान दें, अगर आपको लगातार खांसी (जो ठीक न हो), सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, या खांसी में खून आने जैसे कोई भी लक्षण महसूस हों, तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि शुरुआती पहचान से ही इलाज सफल हो पाता है।

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