नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने डिलीवरी कर्मचारियों के असुरक्षित ढंग से सामान पहुंचाने व परिवहन नियमों का उल्लंघन करने पर चिंता जताई है.
बुधवार को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 का उल्लंघन करने वाले डिलीवरी कर्मियों द्वारा माल के असुरक्षित परिवहन पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया.
वकील शशांक श्री त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि राजधानी में प्रमुख ऑनलाइन सेवा और ई-कॉमर्स डिलीवरी प्लेटफॉर्म संचालित हो रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि डिलीवरी कर्मी अक्सर दोपहिया वाहनों पर बड़े आकार और अधिक वजन वाले पार्सल ले जाते हैं, जिससे सड़क सुरक्षा को गंभीर खतरा होता है और स्वयं कर्मचारियों पर भी काफी शारीरिक दबाव पड़ता है.
याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह की प्रैक्टिस से-
- वाहनों की स्थिरता प्रभावित होती है,
- सवारी की दृश्यता में बाधा उत्पन्न होती है,
- ब्रेकिंग क्षमता कम हो जाती है,
- और दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है
- इससे न केवल डिलीवरी कर्मियों की जान को खतरा है, बल्कि अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं और पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी दांव पर लगी है.
याचिका में कहा गया है कि इस तरह की प्रैक्टिस न केवल डिलीवरी कर्मियों, बल्कि अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं और पैदल यात्रियों को भी खतरे में डालती हैं.
कंपनियों की लापरवाही और जिम्मेदारी
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि ये कंपनियां चाहे वे प्रत्यक्ष नियोक्ता हों या थर्ड-पार्टी ठेकेदारों के माध्यम से डिलीवरी करवा रही हों, न तो सुरक्षित वाहन उपलब्ध करवा रही हैं और न ही परिवहन सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कर रही हैं. यह लापरवाही मोटर वाहन अधिनियम के तहत कॉर्पोरेट दायित्व, दुर्घटनाओं में प्रतिनिधिक दायित्व और उपभोक्ता दिसंरक्षण कानूनों के तहत दंड का कारण बन सकती है.
याचिका की मांगें
- अनुमेय आकार और भार सीमा से अधिक पार्सल के लिए दोपहिया वाहनों के उपयोग पर प्रतिबंध,
- वाहन चयन को पार्सल के आकार पर आधारित करने की प्रणाली
- डिलीवरी कर्मियों के लिए अनिवार्य सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण
- वर्तमान डिलीवरी प्रथाओं का व्यापक ऑडिट
दिल्ली सरकार ने अदालत में कहा
याचिका के जवाब में, दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को सूचित किया कि ऐसी चिंताओं को दूर करने के लिए एक नियामक ढांचा – दिल्ली मोटर वाहन एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाता योजना, 2023 पहले ही तैयार किया जा चुका है.
न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने भारत सरकार और दिल्ली सरकार सहित प्रतिवादियों को अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. अदालत ने उनसे 2023 की योजना के कार्यान्वयन और प्रवर्तन के संबंध में आंकड़े भी उपलब्ध कराने को कहा. मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को सूचीबद्ध की गई है.

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