जबलपुर: महंगाई की वजह से मध्यम वर्ग परेशान है, इसलिए जनता आने वाले राज्य सरकार के बजट में महंगाई पर लगाम लगवाना चाहती है. लोग सस्ती बिजली चाहते हैं, बिजली कंपनियां बिजली के दाम बढ़ाना चाहती हैं. इसलिए सरकार को बिजली के मामले में अतिरिक्त बजट देना चाहिए. इंदौर में गंदे पानी से कई लोगों की मौतों के बाद साफ पानी के लिए बजट की जरूरत होगी. वहीं पूरे साल नेता शानदार सड़कों की बात करते हैं, इसलिए सड़कों के लिए भी अतिरिक्त बजट जरूरी है.
16,436 करोड़ था सड़क का बजट
2025-26 के बजट में मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने सड़कों के निर्माण के लिए 16436 करोड़ रुपया खर्च करने की बात कही थी और 1000 किलोमीटर लंबी नई सड़कों की घोषणा की गई थी. वहीं 5200 किलोमीटर के प्रोजेक्ट पूरे होने की संभावना जताई गई थी.
नई घोषणाओं के लिए नया पैसा चाहिए
लेकिन इसके बाद मध्य प्रदेश में कई नई सड़कों की घोषणाएं की गई. इनमें ग्रीन फील्ड हाईवे, नर्मदा एक्सप्रेसवे, चंबल एक्सप्रेसवे जैसी कई बड़ी परीयोजनाओं की चर्चा पूरे साल चली है. अब देखना होगा कि इस बार के बजट में राज्य सरकार अपने 5 साल में एक लाख किलोमीटर सड़कों के लक्ष्य के कितने करीब पहुंच पाती है. वहीं ग्रामीण सड़कों की हालत खराब है. हाईवे के साथ छोटे पहुंच मार्गों को बेहतर करने के लिए भी बजट की दरकार है.
पानी के लिए ज्यादा पैसों की मांग
2025 और 26 में मोहन सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए 17137 करोड़ रुपए की घोषणा की थी. वाटर सप्लाई और सेनिटेशन पर कुल मिलाकर 20124 करोड़ रुपया खर्च किया जाना था. लेकिन इस बार के बजट में शहरी पानी सप्लाई में साफ पानी मुद्दा होना चाहिए. जबलपुर कांग्रेस के नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा का कहना है कि, ''इंदौर में जो घटना घटी है उसके बाद राज्य सरकार को साफ पीने की पानी की पुरानी लाइनों को ठीक करने के लिए भी बजट में प्रावधान करना चाहिए, क्योंकि पीने के गंदे पानी की समस्या पूरे प्रदेश में होती है.''
बिजली की दरें कम करने की मांग
2025-26 के बजट में मध्य प्रदेश में बिजली के लिए 34,130 करोड़ रुपया खर्च करने का प्रावधान रखा गया था. इसमें लगभग 1200 करोड़ रुपया एक मुफ्त समाधान योजना में सर चार्ज माफी के लिए रखा गया था और 7132 करोड़ रुपया अटल ग्रह ज्योति योजना के लिए दिया गया था. खेती के पंपों को 5,299 करोड़ रुपए की मुक्त बिजली दी गई थी. लेकिन बीते दिनों बिजली कंपनियों ने बिजली के दाम 10% तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, इसका असर आम जनता पर पड़ेगा. सौरभ शर्मा का कहना है कि, ''सरकार को बिजली के दाम नहीं बढ़ाना चाहिए, क्योंकि पहले ही आम आदमी की महंगाई से कमर टूट चुकी है.''
भाजपा के कोषाध्यक्ष बोले-बेहतर होगा बजट
मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के कोषाध्यक्ष चार्टर्ड अकाउंटेंट अखिलेश जैन का कहना है कि, ''पिछले साल के बजट से इस साल का बजट और बड़ा होगा. जाहिर सी बात है जब बजट ज्यादा होगा तो ज्यादा योजनाओं पर पैसा खर्च होगा. मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में तरक्की कर रहा है. मोहन यादव उद्योगों के अनुकूल माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, इसीलिए पहले रीजनल इन्वेस्टर समिट की गई. इसके बाद ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की गई. इन दोनों ही सबमिट का उद्देश्य मध्य प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा निवेश आकर्षित करने का है.''
अखिलेश जैन ने बताया कि, ''इस बार के बजट में फिस्कल डेफिसिट कम करने की कोशिश की जाएगी और जीडीपी में बढ़ोतरी होने की संभावना है. अखिलेश जैन का कहना है कि, ''जबलपुर के मटर की जीआई टैगिंग हुई है और एक जिला एक उत्पाद की वजह से मटर के व्यापार को और बेहतर करने की कोशिश की जा रही है.''
पुरानी घोषणाओं पर भी ध्यान दें वित्त मंत्री
जबलपुर कांग्रेस के अध्यक्ष सौरभ शर्मा का कहना है कि, ''बजट अब लोगों की चर्चा का विषय नहीं रहा, क्योंकि बजट में जो बोला जाता है वह होता नहीं है. सौरभ शर्मा का कहना है कि शिवराज सिंह के कार्यकाल के दौरान जबलपुर में मेट्रो ट्रेन की घोषणा की गई थी लेकिन इंदौर और भोपाल में तो मेट्रो रेल शुरू हो गई है लेकिन जबलपुर में इसकी कोई चर्चा तक नहीं है.'' वहीं, दूसरी तरफ सौरभ शर्मा ने वित्त मंत्री से अपील की है कि वह नई घोषणाएं न करें बल्कि अपने मौजूदा कामों को बेहतर कर लें.
महाकौशल के विकास के लिए एयर कनेक्टिविटी बढ़ाई जाए
जबलपुर की जागरूक नागरिक रजत भार्गव का कहना है कि, ''जबलपुर शहर के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है. इंदौर से 100 से ज्यादा फ्लाइट चल रही हैं. भोपाल में भी 50 से ज्यादा फ्लाइट हैं. जबलपुर में मात्र 6 फ्लाइट ही चल रही है लेकिन राज्य सरकार इस विषय में कोई ध्यान नहीं दे रही है. एयर कनेक्टिविटी नहीं होने की वजह से जबलपुर ही नहीं पूरे महाकौशल का विकास प्रभावित हो रहा है.''
IIM, आईआईटी और एम्स जैसे संस्थान खोले जाएं
रजत भार्गव ने सरकार से सवाल किया है कि, ''जबलपुर की आबादी 25 लाख के करीब हो गई है, लेकिन इतनी बड़ी आबादी को मेट्रो शहर का दर्जा हासिल नहीं है. जबलपुर में इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस जैसे कॉलेज कब खुलेंगे. जबकि जबलपुर जितनी ही आबादी के मध्य प्रदेश के अलावा देश के दूसरे राज्यों के शहर जबलपुर से ज्यादा तरक्की कर रहे हैं.''
लॉजिस्टिक हब बनाया जाए
रजत भार्गव का कहना है कि, ''जबलपुर भौगोलिक रूप से देश के केंद्र में बसा हुआ है और देश के किसी भी कोने में व्यापार करने वाले कारोबारी के लिए जबलपुर से समान पहुंचना सबसे सरल है. लेकिन जबलपुर लॉजिस्टिक हब नहीं है. यदि जबलपुर लॉजिस्टिक हम बन जाता है तो इसका फायदा देश भर के व्यापारियों को मिलेगा और सप्लाई चैन में सरलता होगी.''

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