भारत और इंग्लैंड के बीच खेला गया पांचवां टेस्ट मैच रोमांच के चरम पर खत्म हुआ है। भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हरा दिया। आखिरी दिन इंग्लैंड को जीत के लिए सिर्फ 18 रन चाहिए थे, जब इंग्लैंड के खिलाड़ी क्रिस वोक्स दसवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए। मैच के बीच सबसे बड़ी चर्चा क्रिस वोक्स को लेकर रही। इसकी वजा यह थी कि उन्हें पहले दिन कंधे में चोट लगी थी। टीम के एक खिलाड़ी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 'वोक्स जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी के लिए तैयार हैं' और वो बल्लेबाजी करने भी आए। बेशक उन्होंने कोई रन नहीं बनाया और दूसरे छोर पर खड़े रहे लेकिन भागने में कोई कसर नहीं दिखाई और साथ बल्लेबाज एटकिंसन का पूरा साथ दिया। उनके हाथ में काफी दर्द बताया जा रहा था। वोक्स टीम के लिए योगदान बड़ा योगदान दिया इसके लिए उन्हें दर्द झेलना पड़ा। उनकी तुलना ऋषभ पंत से की गई क्योंकि वो भी चोटिल होने के बावजूद बल्लेबाजी करने उतरे थे।
क्या हुआ वोक्स के हाथ को
पांचवें टेस्ट मैच में जब वोक्स बल्लेबाजी करने उतरे तो उन्हें देख हर कोई हैरान था।पहले दिन फील्डिंग करते समय चोटिल हो गए। उनके कंधे में चोट लगी और उन्हें मैदान छोड़कर बाहर जाना पड़ा। वो एक हाथ में प्लास्टर और एक हाथ में बल्ला लेकर मैदान में उतरे। यह बताया गया था कि 'वोक्स जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी के लिए तैयार हैं।
कंधे की चोट क्या होती है?
कंधे की चोट का मतलब है कंधे की हड्डियों, मांसपेशियों, टेंडन यानी जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ते हैं, लिगामेंट्स जोकि हड्डियों को जोड़ने वाले ऊतक हैं या जोड़ों में किसी तरह की चोट या नुकसान। चूंकि कंधा शरीर का सबसे ज्यादा हिलने-डुलने वाला जोड़ है, इसलिए इसमें चोट लगने की संभावना भी ज्यादा रहती है।
कंधे की चोट के प्रकार
डिसलोकेशन- जब ऊपरी भुजा की हड्डी कंधे के सॉकेट से बाहर निकल जाती है।
रोटेटर कफ की चोट- कंधे को स्थिर रखने वाली मांसपेशियों या टेंडन में चोट या सूजन आना।
फ्रैक्चर-कंधे की हड्डियों यानी कॉलरबोन, ऊपरी भुजा या शोल्डर ब्लेड का टूटना।
शोल्डर इम्पिंजमेंट- जब कंधे के अंदर टेंडन दब जाते हैं।
लिगामेंट स्प्रेन- कंधे के लिगामेंट्स का खिंच जाना या फटना।
कंधे की चोट के कारण
गिरना या अचानक चोट लगने से लग सकती है, जैसे खेलते समय या एक्सीडेंट में। वोक्स को फील्डिंग करते समय चोट लगी थी। कई बार बार-बार सिर के ऊपर से काम करना जैसे स्विमिंग, टेनिस, वजन उठाना आदि से भी लग सकती है। यह चोटें उम्र बढ़ने के साथ घिसावट लग सकती हैं।
कंधे की चोट के लक्षण
पीड़ित को हल्का से तेज दर्द, खासकर हाथ हिलाने पर दर्द और बेचनी महसूस हो सकती है। चोट वाली जगह पर सूजन और नीला पड़ सकता है, हाथ हिलाने में दिक्कत, हाथ उठाने या घुमाने में परेशानी हो सकती है। कंधे में ताकत की कमी महसूस हो सकती है।
कंधे की चोट का इलाज
एक्सपर्ट मानते हैं कि कंधे में चोट लगने पर आराम और बर्फ की सिकाई की जा सकती है। दर्द और सूजन कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर दवाएं ली जा सकती है। कंधे की हरकत और ताकत वापस लाने के लिए फिजियोथेरेपी की हेल्प लें। कंधे को सपोर्ट देने के लिए स्लिंग या ब्रेस की हेल्प लें।

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