सीहोर। सीहोर जिले (Sehore District) के इछावर विधानसभा क्षेत्र में सोमवार को सियासत का तापमान अचानक तेज हो गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने वहीं से पदयात्रा (Pilgrimage) का शंखनाद किया, जिसे भाजपा (BJP) का अजेय किला माना जाता है। यह वही इलाका है, जहां से आठ बार विधायक रह चुके राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) का गहरा राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। ऐसे में दिग्विजय सिंह का यहां से सीधे संघर्ष का एलान केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सत्ता की नींव को चुनौती देने वाला संदेश है।
राजनीति में जहां नेता वीआईपी कल्चर में सिमटते जा रहे हैं, वहीं 78 वर्षीय दिग्विजय सिंह ने ग्राम खेरी में एक साधारण कार्यकर्ता मांगीलाल पटेल के घर रात बिताकर संगठन को भावनात्मक संबल दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया। उनकी समस्याएं सुनीं और गुटबाजी से ऊपर उठकर संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। यह दृश्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए केवल राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की पुनर्प्रतिष्ठा बन गया।
पदयात्रा की शुरुआत करते ही दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना देश के राष्ट्रपिता का अपमान है। उन्होंने इसे केवल नाम परिवर्तन नहीं बल्कि विचारधारा पर हमला बताया। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक गांधी का नाम मनरेगा से दोबारा नहीं जोड़ा जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। वे गांव-गांव जाकर मजदूरों से मिल रहे हैं, जॉब कार्ड दिखवाकर उन्हें उनके अधिकारों का पाठ पढ़ा रहे हैं।
इस पदयात्रा का सबसे बड़ा संदेश यह है कि दिग्विजय सिंह ने फिर से राजनीति का केंद्र गरीब और ग्रामीण भारत को बना दिया है। वे खेतों, चौपालों और पगडंडियों पर निकलकर उन परिवारों से संवाद कर रहे हैं, जिनकी आवाज सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुंचती। यह वही वर्ग है जो चुनावी परिणाम तय करता है। दिग्विजय सिंह का फोकस साफ है कि सत्ता का रास्ता गांव से होकर जाता है।
इस आंदोलन की गूंज दिल्ली तक सुनाई देने लगी है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को स्वयं मैदान में उतरकर इस अभियान को “भ्रष्टाचार बचाओ संग्राम” कहना पड़ा, जिससे साफ है कि दिग्विजय की रणनीति भाजपा को बेचैन कर रही है। कांग्रेस संगठन में भी इस यात्रा से नई जान फूंकी गई है। कार्यकर्ताओं में वर्षों बाद उत्साह और आत्मविश्वास लौटता दिखाई दे रहा है।
इछावर की इस पदयात्रा को केवल स्थानीय राजनीति की घटना समझना भूल होगी। यह मध्यप्रदेश की राजनीति में वैचारिक पुनर्जागरण का संकेत है। दिग्विजय सिंह ने बता दिया है कि उम्र नहीं, संकल्प राजनीति को दिशा देता है। यह यात्रा कांग्रेस के लिए केवल चुनावी अभियान नहीं, बल्कि संगठनात्मक पुनर्निर्माण और वैचारिक संघर्ष का आरंभ बनती दिख रही है।

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