Chhattisgarh Holi से जुड़ी एक अनोखी परंपरा धमतरी जिले के एक छोटे से गांव में आज भी जीवित है। यहां होली का त्योहार पूरे प्रदेश से अलग अंदाज में मनाया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इस गांव में होली तिथि से ठीक सात दिन पहले ही शुरू हो जाती है।
धमतरी से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित सेमरा (सी) गांव में रंगों का जश्न एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाता है। ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवा झूमते हैं और एक-दूसरे को रंग लगाकर त्योहार की खुशियां बांटते हैं। गांव में माहौल इतना उत्साहपूर्ण होता है कि आसपास के लोग भी इस अनोखी Chhattisgarh Holi को देखने पहुंचते हैं।
इस परंपरा के पीछे एक लोककथा प्रचलित है। ग्रामीणों के अनुसार, सदियों पहले गांव में भयंकर बीमारी और अकाल जैसी विपदाएं आई थीं। तब ग्राम देवता श्री सिरदार देव ने गांव के मुखिया को स्वप्न में दर्शन दिए। उन्होंने आदेश दिया कि सभी प्रमुख त्योहार तिथि से सात दिन पहले मनाए जाएं, तभी गांव में सुख-शांति बनी रहेगी। शुरुआत में लोगों ने इस बात पर विश्वास नहीं किया, लेकिन जब परेशानियां बढ़ीं तो ग्रामीणों ने इस परंपरा को अपनाया। तब से यह रिवाज लगातार निभाया जा रहा है।
केवल होली ही नहीं, बल्कि दिवाली, हरेली और पोला जैसे पर्व भी यहां सात दिन पहले मनाए जाते हैं। समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन Chhattisgarh Holi की यह अनोखी परंपरा आज भी आस्था और विश्वास की मिसाल बनी हुई है। ग्रामीणों का मानना है कि इसी से गांव में समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।

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