बिहार की मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर लगातार विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है. इस बीच सांसद पप्पू यादव ने एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि 9 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान किया गया है. इस दौरान चुनाव आयोग का भी घेराव किया जाएगा. पप्पू यादव ने इस बंद को समर्थन देने के लिए विपक्ष से भी मांग की है.
वहीं, उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘बिहार के सभी युवाओं, दलित, अति पिछड़े, अल्पसंख्यक और सभी समाज के लोगों से विनम्र आग्रह है BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) भी अपने भाई-बहन हैं. वह हमें फोन कर बता रहे हैं वह भी सरकार के भीषण दबाव में हैं. मतदाता पुनरीक्षण के लिए उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है. वह गांव घर आएं तो उन्हें प्रेम से कोई काम न करने दें.’
उन्होंने कहा, ‘बीएलओ को आराम से चाय पानी दें, बिठा लें, कोई फॉर्म भरने न दें. न फॉर्म बांटने दें. उनके सारे फॉर्म को अग्नि को समर्पित कर दें. उनसे कोई दुर्व्यवहार न करें, वह हमारे अपने ही हैं. वह फिरंगियों के मानस पुत्र सरकार की गुलामी की मानसिकता के शिकार हैं. उन्हें भी इस जुल्मी सरकार के जुल्म से आजाद कराना है.’
क्या कह रहा है चुनाव आयोग?
एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग (ईसीआई) का कहना है कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो कानूनी रूप से अनिवार्य है. वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे “लाखों” वास्तविक मतदाता, खास तौर पर गरीब, प्रवासी और हाशिए पर रहने वाले मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि 22 साल बाद हो रहा यह संशोधन संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के अनुरूप है. वहीं विपक्षी दलों का दावा है कि यह समय विधानसभा चुनावों के करीब है और इससे “मतदाता आधार में हेराफेरी” हो सकती है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का कहना है कि लोकतंत्र में कानून से ज्यादा पारदर्शी कुछ नहीं है. कुछ लोगों की आशंकाओं के बावजूद SIR यह सुनिश्चित करेगा कि सभी पात्र व्यक्ति इसमें शामिल हों.

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