हरदोई
धोखाधड़ी के केस में हरदोई जेल में बंद आजम खान के बेटे और सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान मंगलवार को करीब 17 महीने बाद रिहा हो गए। कोर्ट से उनकी जमानत मंजूर होने के बाद सोमवार को रिहाई का परवाना जेल प्रशासन के लिए भेज दिया गया था। दो जन्म प्रमाण पत्र के मामले में कोर्ट द्वारा अक्तूबर 2023 में सात साल की सजा सुनाए जाने के बाद से सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को न्यायिक अभिरक्षा में लेते हुए रामपुर जिला जेल भेज दिया था।
उनके साथ ही उनके पिता आजम खान और मां तजीन फात्मा को भी जेल भेज दिया गया था। सुरक्षा कारणों से आजम खान को सीतापुर, अब्दुल्ला आजम को हरदोई जेल शिफ्ट किया गया था। तब से आजम और अब्दुल्ला जेल में ही हैं। हालांकि, तजीन फात्मा जमानत पर रिहा हैं। अब अब्दुल्ला भी सलाखों से बाहर आ गए हैं। अब्दुल्ला के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने बताया कि अदालत ने चंद रोज पहले जमानत मंजूर कर दी थी लेकिन,जमानतियों का सत्यापन आदि की औपचारिताएं पूरी होने के बाद सोमवार को रिहाई परवाना जारी हो गया। आज उनकी रिहाई हो गई है। उनकी रिहाई की सूचना से समर्थकों में खुशी की लहर है।
बिना न्यायालय की अनुमति के अब्दुल्ला आजम देश नहीं छोड़ेंगे
हरदोई जेल में बंद सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम भले ही मंगलवार को सलाखों से बाहर आ जा गए लेकिन, जिन शर्तों पर उनकी जमानत अर्जी अदालत ने मंजूर की है, उनके अनुसार वह जमानत अवधि में देश नहीं छोड़ सकेंगे। मालूम हो कि पूर्व में शत्रु संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने के आरोप से घिरे सपा नेता आजम खान व अब्दुल्ला आजम को रामपुर पुलिस ने क्लीन चिट दे दी थी। जिस पर यह मामला शासन तक पहुंचा था। जिसके बाद इस मामले में शासन ने दोबारा विवेचना के आदेश दिए गए थे। एसपी ने इस मामले की विवेचना अपराध शाखा के इंस्पेक्टर नवाब सिंह को सौंपी थी। नवाब सिंह इस वक्त रामपुर में शहर कोतवाल हैं। इस मामले में बीते मंगलवार को एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम की जमानत अर्जी मंजूर की थी। लेकिन, कोर्ट ने अपने आदेश में चार शर्तें भी लगाई हैं। कोर्ट ने कहा है कि बिना न्यायालय की अनुमति के अब्दुल्ला आजम देश नहीं छोड़ेंगे, प्रत्येक तिथि पर न्यायालय में हाजिर होंगे और गवाहों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे एवं विचारण में पूरा सहयोग करेंगे।

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