आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह साल 2030 तक दुनिया भर में नौकरियों और काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने रिपोर्ट में कहा कि 54 फीसदी बिजनेस नेतृत्वकर्ता को नौकरियां के खत्म होने का डर है। यह रिपोर्ट 'फोर फ्यूचर्स फॉर जॉब्स इन द न्यू इकोनॉमी-2030'नाम से जारी हुई है।
9.2 करोड़ इतनी मौजूदा नौकरियों के खत्म होने का खतरा
दुनिया भर के 10,000 से अधिक बड़े अधिकारियों के बीच सर्वे किया गया। इसमें कहा गया कि 17 करोड़ इतनी नई नौकरियां वैश्विक स्तर पर पैदा होने का अनुमान है। वहीं इसमें से करीब 9.2 करोड़ इतनी मौजूदा नौकरियों के खत्म होने का खतरा है।रिपोर्ट के अनुसार, 54 फीसदी नेताओं का मानना है कि एआई मौजूदा नौकरियों को खत्म कर देगा। इसमें से सिर्फ 24 प्रतिशत ने भरोसा जताया कि इससे नई नौकरियां पैदा होंगी। वहीं सिर्फ 12% का मानना है कि इससे कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी।
निवेश भी मायने रखेगा
रिपोर्ट में कहा गया कि भविष्य कैसा होगा, यह सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि एआई कितना एडवांस है। यह इस पर निर्भर करता है कि सरकारें और कंपनियां आज इंसानी हुनर पर कितना निवेश करती हैं। वहीं लोगों को नई तकनीक के हिसाब से कितनी जल्दी तैयार किया जाता है।
कुछ अलग तथ्य
– 63 फीसदी कर्मचारी ने माना कि उनके पास कौशल की कमी है, जो बिजनेस बदलने में सबसे बड़ी बाधा है
– 85 प्रतिशत कंपनियां अपने मौजूदा कर्मचारी में अतिरिक्त कुशलता को बढ़ाने की योजना बना रह
– आज जो स्किल्स काम आ रही हैं, उनका लगभग 40 फीसदी हिस्सा अगले 5 सालों में अप्रासंगिक हो जाएगा
भविष्य की चार स्थितियां : परिदृश्य मुख्य प्रभाव अनुमान सुपरचार्ज्ड प्रोग्रेस तीव्र नवाचार और नई श्रेणियां 17 करोड़ नई नौकरियों का सृजन।
एज ऑफ डिस्प्लेसमेंट तेजी से छंटनी बेरोजगारी में उछाल।
को-पायलट इकोनॉमी एआई सहायक बनेगा 86% व्यवसाय इसे अपनाएंगे
स्टॉल्ड प्रोग्रेस कौशल की कमी 39% मौजूदा स्किल्स बेकार

More Stories
शेयर बाजार खुलते ही निवेशकों के 5 लाख करोड़ डूबे, जानिए गिरावट की वजह
सर्राफा बाजार में गिरावट: चांदी ₹1040 टूटी, सोना ₹1050 सस्ता
रॉयल एनफील्ड ने 10 लाख बाइक्स बेचने का बनाया रिकॉर्ड