आदिशक्ति ने यहीं किया था चंड-मुंड का वध, हर मनोकामना होती है पूरी और दिव्यता देखकर कहेंगे- जय मां चंडी देवी

19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है और इस खास मौके पर हम आपको हरिद्वार के ऐसे सिद्धपीठ मंदिर के बारे में बताएंगे, जो अपनी दिव्यता के लिए काफी प्रसिद्ध है. बताया जाता है कि माताजी की मुख्य मूर्ति 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई थी. आइए जानते हैं धर्मनगरी हरिद्वार के चंडी देवी मंदिर के बारे में खास बातें…

चैत्र नवरात्रि आने में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं, इस बार 19 मार्च को नवरात्रि के पहले दिन की पूजा अर्चना की जाएगी. नवरात्रि के नौ दिनों मां भवानी के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है. चैत्र नवरात्रि के मौके पर आज हम आपको देवभूमि उत्तराखंड के मां दुर्गा के सिद्धपीठ मंदिर के बारे में बताने जा रहा है. दरअसल देवभूमि उत्तराखंड अपने कण-कण में आध्यात्मिक ऊर्जा समेटे हुए है. इसी पावन धरती पर हरिद्वार धरती धर्म और श्रद्धा का बड़ा केंद्र है. यहां नील पर्वत की ऊंचाई पर स्थित मां चंडी देवी मंदिर अपनी पौराणिक कहानी और आस्था का प्रतीक है. चैत्र नवरात्रि में यहां अलग ही उत्साह देखने को मिलता है

 प्रमुख सिद्धपीठ मंदिर में से एक – मां चंडी देवी मंदिर हरिद्वार में एक महत्वपूर्ण सिद्धपीठ मानी जाती है. कहा जाता है कि अगर हरिद्वार जाएं, तो चंडी देवी और मनसा देवी के दर्शन करना न भूलें. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा माता पूरी करती हैं और भक्तों को हर परेशानियों से दूर रखती हैं. यह हरिद्वार में स्थित तीन ऐसे पीठों में से एक है, अन्य दो मनसा देवी मंदिर और माया देवी मंदिर हैं.

 नील पर्वत के शिखर पर विराजमान हैं मां चंडी देवी – चंडी देवी मंदिर अपनी पौराणिक कथाओं और महत्व के लिए प्रसिद्ध है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हरिद्वार में नील पर्वत के शिखर पर स्थित एक प्रसिद्ध सिद्धपीठ है, जो देवी चंडी (दुर्गा का रौद्र रूप) को समर्पित है. यहां पर भक्त मां के दर्शन कर मनोकामना मांगते हैं. मंदिर की खास बात यह है कि यहां से गंगा नदी और पूरे हरिद्वार का खूबसूरत नजारा दिखता है. पहुंचने के लिए रोपवे की सुविधा है, जो यात्रा को और भी यादगार बना देती है. पैदल चढ़ाई करने वाले श्रद्धालु भी इसे एक विशेष अनुभव मानते हैं.

 यहीं पर हुआ था चंड-मुंड का वध – पौराणिक कहानी के अनुसार देवी चंडी ने शुंभ-निशुंभ के सेनापति चंड और मुंड नामक राक्षसों का वध इसी स्थान पर किया था, जिसके बाद वे कुछ समय के लिए यहां रुकी थीं. फिर, कश्मीर के राजा सुचात सिंह को माता के बारे में पता चला था, जिसके बाद उन्होंने 1929 में मंदिर की स्थापना करवाई थी. हालांकि, कहा जाता है कि मंदिर की मुख्य मूर्ति 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई थी, जबकि मंदिर की वर्तमान संरचना 1929 में कश्मीर के राजा सुचात सिंह ने बनवाई थी.

 पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है मां चंडी देवी मंदिर – मां चंडी देवी मंदिर ना सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. चंडी देवी मंदिर को हरिद्वार के तीन प्रमुख सिद्धपीठों (मनसा देवी और माया देवी के साथ) में से एक माना जाता है, जहां भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी करने और माता के प्रति अपनी आस्था को लेकर दर्शन के लिए आते हैं.