ग्वालियर। नकली शराब परिवहन परमिट और अवैध शराब की आपूर्ति से जुड़े गंभीर आपराधिक मामले में आबकारी आयुक्त, मध्यप्रदेश ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। अपर सत्र न्यायाधीश देपालपुर द्वारा दोष सिद्ध होने के बाद सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड, सेहतगंज (रायसेन) एवं सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड, रोजराचक (रायसेन) के सभी प्रमुख आबकारी लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं।
यह आदेश आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल द्वारा दिनांक 04 फरवरी 2026 को जारी किया गया
नकली परमिट, कूटरचित दस्तावेज और आपराधिक षड्यंत्र साबित अपर सत्र न्यायाधीश देपालपुर द्वारा सत्र प्रकरण क्रमांक 21/2021 (फाइलिंग क्रमांक 975/2021) में दिनांक 23 दिसंबर 2023 को पारित निर्णय में यह सिद्ध हुआ कि आरोपियों ने मिलकर शराब परिवहन के कूटरचित परमिट व बिल्टी तैयार की फर्जी परमिट को असली बताकर उपयोग किया शासन को राजस्व हानि और कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया न्यायालय ने मेसर्स सोम डिस्टलरीज समूह के प्रतिनिधियों, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और निदेशक सहित कई आरोपियों को कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है।
हाईकोर्ट से सजा पर रोक, लेकिन लाइसेंस पर नहीं
इकाइयों द्वारा यह तर्क दिया गया कि उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर ने सजा के क्रियान्वयन पर स्थगन दिया है।
हालांकि आबकारी आयुक्त कार्यालय ने स्पष्ट किया कि सजा निरस्त नहीं की गई है लाइसेंस निलंबन पर कोई रोक नहीं है अधीनस्थ न्यायालय का दोषसिद्धि आदेश यथावत है महाधिवक्ता से प्राप्त अभिमत एवं हाईकोर्ट आदेशों की समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया।
आबकारी अधिनियम की गंभीर धाराओं का उल्लंघन
आबकारी आयुक्त ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला—
धारा 31(1)(ख) – लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन
धारा 31(1)(ग) – अपराध में दोषसिद्धि
धारा 44 – सेवकों के कृत्य के लिए अनुज्ञप्तिधारी की जिम्मेदारी
के अंतर्गत स्पष्ट रूप से दंडनीय है।
इन लाइसेंसों को किया गया निलंबित
सोम डिस्टलरीज प्रायवेट लिमिटेड, सेहतगंज (रायसेन)
डी-1 एफ.एल.-9
सी.एस.-1 (विभिन्न क्रमांक),सी.एस.-1 बी
सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड, रोजराचक (रायसेन):
एफ.एल.-9 ए बी-3 एफ.एल.-9 ए ऑफ बी-3
सभी लाइसेंस मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 31(1) के तहत निलंबित किए गए हैं।
आबकारी विभाग में भी गिरी गाज
इस प्रकरण में लिप्त पाए गए शासकीय अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई है। आबकारी उपनिरीक्षक प्रीति गायकवाड को सेवा से पदच्युत किया जा चुका है। अन्य सेवानिवृत्त अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं।
राज्य में अवैध शराब नेटवर्क पर सबसे बड़ी कार्रवाई
यह आदेश राज्य में अवैध शराब, फर्जी परमिट और संगठित आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है। आबकारी विभाग ने साफ संकेत दिया है कि दोषसिद्धि के मामलों में लाइसेंसधारियों को किसी भी स्तर पर राहत नहीं दी जाएगी।

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