फौलादी जिगर और मजबूत इरादे: सेना के सिपाही ने बॉडी बिल्डिंग में जीता दिल

सागर: महार रेजिमेंट के हवलदार देवेन्द्र कुमार अहिरवार ने बाॅडी बिल्डिंग में ना सिर्फ सेना, बल्कि सागर और मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है. उन्होंंने हाल ही में दिल्ली में आयोजित नेशनल बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप यूनिवर्सल कप ऑफ इंडिया में तीन गोल्ड मेडल जीते हैं. इसके साथ ही इंटरनेशनल काम्पटीशन के लिए प्रो कार्ड हासिल किया है.

 

सैन्य छावनी में बीता बचपन

सबसे खास बात ये है कि हवलदार देवेन्द्र अहिरवार के बाॅडी बिल्डिंग में परफॉर्मेंस देखकर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में पोस्टिंग होने के बावजूद उन्हें सागर में अटैच किया है, जिससे वह अपने घर पर अच्छे से बॉडी बिल्डिंग की प्रेक्टिस कर सकें. देवेन्द्र अहिरवार का बचपन सागर की सैन्य छावनी से लगे गांव पटकुई बरारू में बीता है. उनके पिता और भाई भी आर्मी में है. बाॅडी बिल्डिंग का शौक उन्हें फिल्में देखकर लगा और फिर उन्होंने यूट्यूब पर देश और विदेश के बड़े-बड़े बाॅडी बिल्डर के वीडियो देखकर बाॅडी बिल्डिंग शुरू की.

 

महार रेजिमेंट का हवलदार बना इंटरनेशनल बाॅडी बिल्डर

देवेन्द्र बचपन से ही सेना के माहौल में पले बढ़े हैं. उनके पिता सेना से रिटायर सूबेदार है, वहीं उनके भाई भी सेना में हवलदार के पद पर दिल्ली में पदस्थ हैं. हाल ही में दिल्ली में आयोजित नेशनल बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप यूनिवर्सल कप ऑफ इंडिया में शानदार प्रदर्शन करते हुए देवेंद्र ने ना सिर्फ गोल्ड मेडल जीते, बल्कि प्रोकार्ड भी हासिल किया. अब वे दुनियाभर में इंटरनेशनल काम्पटीशन में हिस्सा लेने के योग्य हो चुके हैं. बढ़िया प्रदर्शन के चलते सेना में सूबेदार पद पर प्रमोशन भी मिलने की संभावना बढ़ गई है.

 

एक दशक से बाॅडी बिल्डिंग में जीतोड़ मेहनत

देवेन्द्र को फिल्मों के जरिए बाॅडी बिल्डिंग का जुनून चढा और करीब 12 साल पहले उन्होंने बाॅडी बिल्डिंग शुरू की, जिसका सिलसिला आज भी जारी है. देवेन्द्र रोजाना 3 घंटे मेहनत करते हैं और डाइट पर विशेष ध्यान देते हैं. इसके साथ ही देश और दुनिया के जाने माने बाॅडी बिल्डर के वीडियो देखकर बारीकियां सीखते हैं. ड्यूटी के दौरान सेना से भी उन्हें सहूलियत मिलती है, ऐसे में वो बाॅडी बिल्डिंग का सिलसिला जारी रखे हुए हैं.

देवेंद्र कुमार ने बताया, "आज के युवाओं में बाॅडी बिल्डिंग का क्रेज है, लेकिन वो शार्टकट से बाॅडी बनाते है. सप्लीमेंट्स तो फिर भी सही है, लेकिन स्टेरॉइड और दूसरी शक्तिवर्धक दवाईयों के जरिए बाॅडी बनाने से वो अपने शरीर का नुकसान कर रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ सोशल मीडिया और नशे के कारण भी युवा वर्ग अपना भविष्य बर्बाद कर रहा है."