इंदौर। नाइजीरियन युवक डॉन पेड्रो चार्लिस जब इंदौर अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने आया तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने डॉन पेड्रो चार्लिस को 10 दिन की न्यायिक हिरासत में रखा और फिर वापस नाइजीरिया भेज दिया. जानकारी के मुताबिक पहले से ही वह इंदौर में अपनी दोनो गर्लफ्रेंड को छोड़कर नाइजीरिया जा चुका था. इस बार पुलिस ने उसे इसलिए पकड़कर वापस भेज दिया क्योंकि वीजा खत्म होने के बाद वह गैरकानूनी तरीके से भारत में रह रहा था।
इंदौर की एक बीपीओ कंपनी में करता था काम
जब इस मामले की जांच की गई तो सामने आया कि डॉन पेड्रो इंदौर की एक बीपीओ कंपनी में काम कर रहा था और कई साल पहले से इंदौर में रह रहा था. 2023 में उसका वीजा समाप्त हो गया था, लेकिन उसने इसकी जानकारी किसी विभाग को नहीं दी थी. इसकी इंदौर में 2 गर्लफ्रेंड थी, जिन्हें छोड़कर वह चला गया था. पूछताछ में डॉन पेड्रो ने बताया कि बेंगलुरु के एक व्यक्ति ने वीजा बढ़ाने के नाम पर उससे पैसे लिए थे।
ऑनलाइन पीडीएफ निकली फेक
उसने ऑनलाइन एक पीडीएफ भेजी थी, लेकिन जांच में वह दस्तावेज फर्जी निकला और वीजा की अवधि नहीं बढ़ी. हीरानगर पुलिस ने डॉन पेड्रो को 17 फरवरी 2026 को पकड़ा था और 1 मार्च को नाइजीरिया भेज दिया. पुलिस ने उसे थाने में ही एक अलग सेल बनाकर रखा था। इसके बाद विदेशी नागरिकों से संबंधित यूनिट को सूचना दी गई. सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसे नाइजीरिया भेज दिया गया हैं।
पुलिस कमिश्नर है डॉन पेड्रो के पिता
जब डॉन पेड्रो की पारिवारिक जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि उसके पिता नाइजीरिया के कोर्ट होसकोरच शहर में पुलिस कमिश्नर हैं. पुलिस बातचीत में डॉन चार्ल्स ने बताया कि बोको हराम आतंकी संगठन के खतरे के कारण उन्होंने अपने बच्चों को अलग-अलग देशों में भेजा है. डॉन पेड्रो भारत आया था, जबकि उसके अन्य भाई पुर्तगाल, यूके और अन्य देशों में रहते हैं।

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