November 7, 2026

मध्य प्रदेश में बीजेपी नेताओं के सामने नई चुनौती, गांवों में विरोध की आशंका

भोपाल। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों के दौरों पर जाने को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। सत्ता और संगठन की ओर से दिए गए निर्देशों के बावजूद कई मंत्रियों, सांसदों और विधायकों ने अब तक अपने ग्रामीण दौरों का कार्यक्रम जारी नहीं किया है। जनप्रतिनिधियों को आशंका है कि खाद की अनुपलब्धता और बिजली से जुड़ी समस्याओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें जन-आक्रोश या घेराबंदी का सामना करना पड़ सकता है।

जबकि सत्ता व संगठन ने चार दिवस पूर्व निर्देश दिए थे कि दीपावली से गोवर्धन पूजा की अवधि के दौरान जनप्रतिनिधि अनिवार्य रूप से गांवों का रुख करें, वहां के वासियों से संवाद स्थापित करें तथा शासकीय कल्याणकारी योजनाओं का जमीनी फीडबैक लें। इसके अतिरिक्त, यदि ग्रामीण किसी समस्या का सामना कर रहे हों तो उन्हें राहत पहुंचाना भी तय किया गया था। इस अभियान के तहत ऐसे गांवों का चयन किया जाना था जहां नि:शुल्क रजिस्ट्री अभियान शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुका हो। आधिकारिक रूप से किसी भी जनप्रतिनिधि ने दौरे से इंकार नहीं किया है, परंतु सूत्रों के अनुसार कुछ मंत्रियों और विधायकों ने संगठन को अवगत कराया है कि वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति प्रतिकूल हो सकती है।

मंत्रिपरिषद् की बैठक में दिए गए थे निर्देश

विगत कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से निर्देश जारी किए गए थे कि त्यौहार के अवसर पर मंत्री व विधायक ग्रामीण अंचलों का दौरा करेंगे। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों को हिदायत दी गई थी कि वे जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित कर उनकी सुविधानुसार गांवों को चिन्हित करें तथा स्वयं भी दौरों के समय उपस्थित रहें।

ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष की तीन प्रमुख वजहें

  • खाद का संकट: रबी फसल के लिए खेतों की तैयारी का कार्य तीव्र गति से जारी है। कम वर्षा के कारण किसान समय से पूर्व बुवाई की मंशा रख रहे हैं, परंतु खाद की भारी किल्लत बनी हुई है। इस समस्या से परेशान होकर लगभग 6,392 किसान मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं अन्य माध्यमों पर शिकायतें दर्ज करा चुके हैं।

  • ट्रांसफार्मर की समस्या: अनेक गांवों में कृषि सिंचाई हेतु स्थापित ट्रांसफार्मर या तो ठप पड़े हैं अथवा ओवरलोडिंग की समस्या से ग्रस्त हैं। लगभग 2,876 किसानों ने इसको लेकर शिकायत दर्ज कराई है। किसानों का आरोप है कि शत-प्रतिशत बकाया भुगतान की शर्त रखी जा रही है, जबकि कई स्थानों पर राशि जमा होने के उपरांत भी सुधार कार्य नहीं किया गया है।

  • बिजली आपूर्ति में व्यवधान: कृषि कार्य हेतु नियमानुसार 10 घंटे निर्बाध बिजली दिए जाने का प्रावधान है, परंतु धरातल पर अघोषित विद्युत कटौती का सिलसिला जारी है। तकनीकी खामियों अथवा फॉल्ट के कारण बंद रहने वाले समय की भरपाई नहीं की जा रही है, जिससे किसानों को रात्रि में सिंचाई के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।