रांची। झारखंड उच्च न्यायालय ने आज 6 नवंबर को राज्य सरकार द्वारा जारी उस विवादित आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है, जिसके तहत वर्ष 2024 की झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC-CGL) परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने राज्य सरकार के इस फैसले को अत्यंत अनुचित और अन्यायपूर्ण करार दिया। यह महत्वपूर्ण फैसला उन दर्जनों अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर आया है, जिन्होंने सरकार के निर्णय के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने 18 अगस्त को कथित प्रश्नपत्र लीक और व्यापक अनियमितताओं के आरोपों का हवाला देते हुए परीक्षा निरस्त करने की अधिसूचना जारी की थी। उच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक फैसले से परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले हजारों योग्य अभ्यर्थियों को बहुत बड़ी राहत मिली है और उनकी नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
अभ्यर्थियों की याचिका और अदालत का फैसला
परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले अनेक अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के 18 अगस्त के निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई के उपरांत न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने सरकार की परीक्षा रद्द करने वाली अधिसूचना को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क था कि सरकार ने इतना बड़ा और प्रशासनिक कदम उठाने से पहले सफल अभ्यर्थियों को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का कोई अवसर ही नहीं दिया। उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि कथित अनियमितताओं के आधार पर सभी निष्ठावान और सफल उम्मीदवारों के भविष्य को अधर में लटकाना पूरी तरह अनुचित है, जिससे हजारों परिवारों की उम्मीदें प्रभावित हो रही थीं।
अदालत में राज्य सरकार की दलीलें
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए तर्क दिया था कि भर्ती परीक्षा की शुचिता भंग हुई थी और बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के साथ-साथ प्रश्नपत्र लीक होने के पुख्ता प्रमाण मिले थे। सरकार का कहना था कि इसी आधार पर पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए पूरी परीक्षा को निरस्त करने का कड़ा फैसला लिया गया था। हालांकि, उच्च न्यायालय ने अभ्यर्थियों के पक्ष को न्यायसंगत मानते हुए सरकार की दलीलों को अपर्याप्त पाया और अधिसूचना को रद्द करने का आदेश सुनाया।
पूर्व के फैसले और वर्तमान स्थिति
उल्लेखनीय है कि हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कई बड़े प्रशासनिक कदम उठाए थे। इसके तहत वर्ष 2014 से आयोजित जेपीएससी, जेएसएससी और आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से हुई लगभग 22 भर्ती परीक्षाओं को निरस्त किया गया था तथा 23 अन्य परीक्षाओं की गहन जांच के आदेश भी जारी किए गए थे। यह समूची कार्रवाई राज्य भर में परीक्षार्थियों और अभ्यर्थियों के व्यापक आंदोलनों के बीच की गई थी। परंतु, अब उच्च न्यायालय द्वारा जेएसएससी-सीजीएल 2024 परीक्षा रद्द करने का फैसला निरस्त कर दिए जाने से इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।

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