November 4, 2026

गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण को 56 भोग ही क्यों लगता है, 55 या 57 क्यों नहीं?

दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा में भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाने की परंपरा काफी खास मानी जाती है. इस दिन मंदिरों से लेकर घरों तक तरह-तरह के पकवान, मिठाइयां, फल और दूसरी खाने की चीजें तैयार की जाती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान कृष्ण को 56 भोग ही क्यों चढ़ाए जाते हैं?

आखिर इस संख्या के पीछे क्या कहानी है और 55 या 57 भोग क्यों नहीं लगाए जाते? दरअसल, इसके पीछे भगवान कृष्ण की एक ऐसी लीला जुड़ी है, जिसमें उन्होंने पूरे सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी.
गोवर्धन पूजा पर 56 भोग लगाने के पीछे क्या है कहानी?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को दिन में आठ बार भोजन कराया जाता था. माता यशोदा उन्हें अलग-अलग समय पर तरह-तरह के पकवान खिलाती थीं. इसी बीच एक बार ब्रज में भगवान इंद्र के प्रकोप से मूसलाधार बारिश होने लगी. दरअसल, ब्रजवासियों ने श्रीकृष्ण के कहने पर इंद्र की पूजा करने के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी. इससे इंद्र देव नाराज हो गए और उन्होंने पूरे ब्रज में तेज बारिश शुरू कर दी.

बारिश से लोगों और पशुओं को बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया. इसके नीचे सभी ब्रजवासी और उनके पशु सुरक्षित आ गए. मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने लगातार सात दिनों तक पर्वत को उठाए रखा. इस दौरान उन्होंने भोजन भी नहीं किया.

सात दिन और आठ पहर का क्या है कनेक्शन?
धार्मिक कथा के अनुसार, जब सात दिनों बाद बारिश रुकी और ब्रजवासी सुरक्षित हो गए, तब माता यशोदा और सभी लोगों को कृष्ण के भोजन न करने की चिंता हुई. उन्होंने सोचा कि कान्हा ने सात दिनों तक कुछ नहीं खाया है, इसलिए उनके लिए सात दिनों के हिसाब से भोजन तैयार किया जाए. चूंकि श्रीकृष्ण को एक दिन में आठ बार भोजन कराया जाता था, इसलिए सात दिनों के आठ पहर के हिसाब से 56 तरह के पकवान तैयार किए गए.